संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : दहेज क्रूरता अधिनियम के एक मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त को पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सजा के साथ साथ अभियुक्त को 21 हजार रुपये का अर्थदंड भी जमा करना होगा।

अभियोजन के अनुसार वादिनी लता रावत ने प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रानीखेत में 28 मई 2017 को दी तहरीर में कहा है कि उसकी अभियुक्त कमलेश प्रसाद उर्फ कुलदीप जोशी से फेसबुक के जरिए जान पहचान हुई। जिसमें उसे अपने आप को चौखुटिया के भनोटी गांव को होना बताया। साथ ही यह भी बताया कि वह सीआईएसएफ में अस्टिटेंट कमाडेंट है और वर्तमान में दिल्ली मेट्रो में कार्यरत है। अभियुक्त ने वादिनी को सोशल मीडिया के जरिए अपने वर्दी में फोटो भी भेजे। जिसके बाद अभियुक्त वादिनी के घर आया और परिजनों को विश्वास में लेकर हिंदू रीति रिवाज के साथ उसके साथ विवाह भी कर लिया। विवाह के बाद अभियुक्त वादिनी से मारपीट करने लगा और दहेज के रूप में दो लाख रुपये की मांग करने लगा। 25 मई 2017 को जब वादिनी की बड़ी बहन ने उसकी विवाह की फोटो फेसबुक में अपलोड की तो पता चला कि अभियुक्त शातिर प्रवृति का है और पूर्व में भी अन्य से विवाह कर चुका है। जबकि उसके खिलाफ अन्य थानों में कई मामले भी दर्ज हैं।

इस मामले का विचारण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा मनमोहन सिंह के न्यायालय में हुआ। अभियोजन की ओर से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी अरूण गौड़ ने न्यायालय में बारह गवाह परीक्षित कराए। लिखित और मौखिक साक्ष्यों पर विचारण के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन सिंह ने कमलेश प्रसाद पुत्र रामानंद वास्तविक निवासी ग्राम डूंगरी, गैरसैंण को दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दोषी पाते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास और इक्कीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

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Posted By: Jagran