मौलेखाल (अल्मोड़ा), जेएनएन : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को पेयजल मुहैया कराने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं तो बनाई जाती हैं। लेकिन निर्धारित अवधि में योजनाओं का निर्माण न होने के कारण इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ता है। अफसर और जनप्रतिनिधि योजनाओं को पूरा करने के वायदे तो करते हैं। लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य कछुआ गति से ही चल रहा है।

विकास खंड के सैंकड़ों गांवों और बाजारों को गुलार पेयजल योजना से पानी की आपूíत की जाती थी। लेकिन बसासत बढ़ने के साथ ही यह योजना यहां के लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित होने लगी। जिस कारण अब गर्मियों के मौसम में यहां पीने के पानी के लिए लोगों को दिन रात एक करना पड़ता है। पेयजल समस्या को दूर करने के लिए करीब छह साल पहले यहां करीब 30 करोड़ की लागत वाली कोटेश्वर-शशीखाल और लगभग 38 करोड़ रुपये लागत की हंसीढूंगा-गुजडुकोट पेयजल योजना की स्वीकृति दी गई। कोटेश्वर शशीखाल पेयजल योजना का कार्य वर्ष 2014 में जल निगम नौला ने शुरू किया। इस योजना को दिसंबर 2018 तक पूरा हो जाना था। लेकिन आज तक इस योजना का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इसी तरह हंसीढूंगा-गुजडुकोट पेयजल योजना के लिए भी विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा। जो आज तक फाइलों में धूल फांक रहा है। पेयजल योजनाओं के निर्माण में इसी तरह देरी होती रहेगी तो इस बार भी गर्मियों के मौसम में विकास खंड के डेढ़ सौ से अधिक गांवों के लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ेगा।

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टैंक और लाइनें तैयार, टेस्टिग का इंतजार

मौलेखाल : हजारों लोगों को पेयजल मुहैया कराने वाली कोटेश्वर शशीखाल पेयजल योजना के टैंक और लाइनें बनकर तैयार हो गई है। लेकिन लाइनों की टेस्टिग और बिजली से जुड़े अनेक कार्य लंबित होने के कारण यह योजना लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है। योजना के निर्माण में देरी से लोगों में काफी नाराजगी भी है।

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कोटेश्वर-शशीखाल पेयजल योजना का निर्माण कार्य जारी है। थोड़ा बहुत जो कार्य बचा है उसे पूरा कराया जा रहा है। जल्द ही योजना से लोगों को पेयजल मुहैया कराया जाएगा।

-केएन सेमवाल, सहायक अभियंता, जल निगम, नौला

Posted By: Jagran

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