संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : एक तरफ पर्यावरण संरक्षण के लिए लाखों के पौधरोपण, दूसरी ओर हरियाली पर सितम। नगर से कुछ दूर गौलना करडि़या पौधालय के पास 25 से ज्यादा हरे भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई। इस क्षेत्र को कुछ वर्ष पूर्व भारतीय सेना की पर्यावरण बटालियन ने गोद ले कुछ वर्ष पूर्व भूस्खलन रोकने तथा नदी पुनर्जनन के मकसद से विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों पौधे लगाए थे।

जल जंगल बचाने की लाख कोशिशों के बावजूद हरियाली को क्षति पहुंचाने से हम बाज नहीं आ रहे। पीक फायर सीजन में जंगल जलने से प्राकृतिक पुनरोत्पादन से उगे बहुपयोगी पौधे खाक हो रहे। इधर गौलना करडि़या स्थित वन विभाग के कोसी रेंज के पौधालय से लगे क्षेत्र में 25 से अधिक हरे भरे पेड़ काट गिराए गए हैं। मौके पर ठूंठ बाकायदा इसकी तस्दीक कर रहे हैं। कटे हुए कुछ पेड़ उधर से गुजर रही विश्वनाथ लमगड़ा रोड के किनारे भी पड़े हैं। सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना की पर्यावरण बटालियन ने इस क्षेत्र को भूस्खलन से बचाने तथा कोसी की सहायक सुवाल नदी के पुनजर्ननन के मकसद से वृहद पौधरोपण किया था। इस संबंध में पर्यावरण बटालियन के अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया मगर नहीं हो सका। वहीं वन क्षेत्राधिकारी दिनकर जोशी ने बताया कि इस क्षेत्र की रखवाली का जिम्मा सेना की पर्यावरण बटालियन के अधीन है।

Posted By: Jagran

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