जागेश्वर धाम में मकर संक्रांति पर खास परंपरा, घृत कमल की गुफा में भोलेनाथ विराजमान, शीत निद्रा में रहेंगे पूरे माघ माह
जागेश्वर धाम में मकर संक्रांति पर एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है। घृत कमल की गुफा में भगवान भोलेनाथ विराजमान ...और पढ़ें
HighLights
जागेश्वर धाम में मकर संक्रांति पर विशेष परंपरा
घृत कमल गुफा में भोलेनाथ शीत निद्रा में
पूरे माघ माह तक जारी रहेगी यह अनूठी परंपरा
जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा। माघ माह के प्रथम दिन मकर संक्रांति के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग जागेश्वर धाम में भगवान भोलेनाथ घृत कमल की गुफा में विराजमान हो गए हैं। प्राचीन परंपराओं के अनुसार शुद्ध गाय के घी से निर्मित इस दिव्य गुफा में भगवान शिव पूरे एक माह तक विराजमान रहेंगे। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान को देखने और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जागेश्वर धाम पहुंच रहे हैं।
मंदिर परिसर में बीते कई दिनों से घृत कमल गुफा के निर्माण की तैयारी चल रही थी। परंपरा के अनुसार गाय के शुद्ध घी को पानी के साथ पिघलाया जाता है, फिर उसे ठंडा कर गुफा जैसी आकृति दी जाती है। इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। विशेष मंत्रोच्चारण के बीच शिवलिंग को घी की इस पवित्र गुफा से ढक दिया जाता है, जिसे ‘घृत कमल’ कहा जाता है।
मान्यता है कि हजारों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के दौरान भगवान शिव शीत निद्रा में रहते हैं। माघ माह भर श्रद्धालु इसी स्वरूप में भोलेनाथ के दर्शन करते हैं। एक माह पूर्ण होने के बाद इस पवित्र घी को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इस प्रसाद के सेवन से कई असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।
घृत कमल अनुष्ठान के चलते जागेश्वर धाम में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। मंदिर समिति व प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
यह भी पढ़ें- अब जागेश्वर धाम में बनेगी पुजारियों की सरकार, आगामी छह दिसंबर को होंगे चुनाव
यह भी पढ़ें- जागेश्वर धाम में बनने जा रहा कुमाऊं का सबसे बड़ा योग रिट्रीट सेंटर, ऐरावत गुफा में भी बनेगा साधना केंद्र
