संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : गैरसैंण कमिश्नरी में अल्मोड़ा को शामिल किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। भड़के कांग्रेसी सड़क पर उतर आए। राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि बगैर जनपदवासियों को विश्वास में लिए सीएम ने यहां की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को चुनावी लाभ के लिए छीन लिया। प्रदर्शनकारियों ने गैरसैंण को बेहद दूर बताते हुए कहा कि उसे मंडल मुख्यालय बनाने से बड़ा लाभ होने वाला नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री का पुतला भी आग के हवाले किया।

गैरसैंण कमिश्नरी के खिलाफ कार्यकर्ता नगर अध्यक्ष पूरन रौतेला की अगुवाई में शुक्रवार को सड़क पर उतर आए। चौघानपाटा पर प्रदर्शन कर उन्होंने सीएम का पुतला फूंका। नगर अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने चुनावी हित साधने के लिए चंद शासनकाल में कुमाऊं की राजधानी व ब्रितानी दौर की कमिश्नरी अल्मोड़ा की ऐतिहासिक पहचान खत्म करने का प्रयास किया है। वहीं, जागेश्वरधाम, सोमेश्वर, रानीखेत आदि का महत्व भी कम किया जा रहा। उन्होंने गैरसैंण को दूर बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रवासियों के धन व समय की बर्बादी होगी।

जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष तारा चंद्र जोशी ने कहा कि नैनीताल से पहले अल्मोड़ा कुमाऊं कमिश्नरी थी, मगर भाजपा सरकार गौरवशाली इतिहास छिपाने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि बेहतर होता, अगर सीएम जनविरोधी डीडीए को खत्म कर बेरोजगारी से निपटने की राह तलाशते। प्रदर्शन करने वालों में पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, महिला इकाई जिलाध्यक्ष लता तिवारी, नगर अध्यक्ष गीता मेहरा, जिला उपाध्यक्ष विनोद वैष्णव, जिला प्रवक्ता राजीव कर्नाटक, जिला सचिव दीपाशु पांडे, वैभव पांडे, किशनलाल, पंकज कांडपाल, मुकेश नेगी आदि शामिल रहे।

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शिक्षाविद् बोले, अल्मोड़ा का अपना महत्व है

गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने पर शिक्षाविद् भी नाराज हो गए हैं। डा. ललित जलाल ने कहा कि गैरसैंण में अल्मोड़ा को शामिल कर यहां की ऐतिहासिक व सांस्कृति पहचान खतरे में पड़ गई है। प्राचीनकाल में पहले कत्यूर राजवंश का केंद्र फिर चंद राजाओं की राजधानी अल्मोड़ा का महत्व अंग्रेजों के दौर में भी बना रहा। अल्मोड़ा की यह पहचान अब खतरे में है। विकास व संस्कृति के नजरिये से भी न्यायोचित नहीं है। सुझाव दिया कि छोटे राज्य में नए जिले बनाए जाते।

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