संवाद सहयोगी, रानीखेत : राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राष्ट्र और समाज को केंद्र में रखते हुए शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है। यह बात मुख्य अतिथि मुख्य शिक्षा अधिकारी हर्ष बहादुर चंद ने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से आयोजित संगोष्ठी में कही। इस मौके पर महासंघ को और अधिक मजबूत बनाने का भी संकल्प लिया गया।

सरस्वती शिशु मंदिर खैरना में हुई संगोष्ठी में चंद ने नई शिक्षा नीति को हर प्रकार से लाभकारी बताया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से किए जा रहे विभिन्न कार्यों की सराहना की। इससे पूर्व महासंघ के सह संगठन मंत्री ओमपाल सिंह ने दीप प्रच्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। कहा कि संगठन का हर कार्य गंभीरता से किए जाने की आवश्यकता है। संगठन का कार्य किसी एक आदमी का नहीं, बल्कि इसके लिए सामूहिक प्रयास होना चाहिए। कहा कि अपनी कमियों को दूर करते हुए संगठन को मजबूत करें व अधिक से अधिक अध्यापकों को इससे जोडे़ं। उन्होंने गुरु और शिष्य परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। वर्तमान और पूर्व की गुरु शिष्य परंपरा की तुलना करते हुए उसका अंतर समझाया। संगठन के प्रांतीय मीडिया प्रभारी कुलवंत सिंह बल ने अतिथियों का स्वागत किया तथा उनका परिचय दिया। एसएसजे परिसर के प्रो. वीडीएस नेगी ने संगठन की समस्त गतिविधियों को विस्तार से बताया। सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य तुलसी प्रसाद भट्ट ने मुख्य अतिथि चंद को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस मौके पर महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. विजय पांडे, शिव नारायण सिंह, बालमुकुंद तिवारी, प्रो.एनडी कांडपाल, मदन सिंह मेर, पंकज साह, वेद प्रकाश दीक्षित, प्रवीण तिवारी, प्रवक्ता चारु चंद्र पांडे आदि मौजूद रहे।

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