संस, चौखुटिया : समुचित देखरेख के अभाव में विकासखंड में कई सिंचाई नहरें खस्ताहाल हैं। इससे काश्तकारों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। यही हालत यहां धुधलिया बिष्ट व धुधलिया महर नहरों की है। कई स्थानों पर नहरें क्षतिग्रस्त होने से खेतों तक पानी की पहुंच नहीं हो पा रहा है। इससे गांवों के काश्तकार परेशान हैं। बार-बार मांग के बाद भी कार्रवाई न होने से लोगों में रोष है।

फुलई के पूर्व प्रधान दयाल मेहरा का कहना है कि इस बीच गेहूं की फसल सिंचाई कार्य चल रहा है, लेकिन नहरों की मरम्मत न होने से परेशानी हो रही है। कई बार विभाग को अवगत कराने के बावजूद समस्या यथावत बनी है। उन्होंने सिंचाई विभाग से शीघ्र नहरों की मरम्मत कर हर खेत खेत तक पानी पहुंचाने की मांग की है।

सरकार विकास कायरें को हकीकत का अमली जामा पहनाने को कितनी सजग है, इसका जीता जागता उदाहरण कोसी नदी से तमाम गांवों के बनी सिंचाई पेयजल योजना है। हालात यह है कि योजना तो बन गई मगर टैंक निर्माण न होने से काश्तकारों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। फसल की सिंचाई को पानी न मिलने से आक्रोशित ग्रामीण अब आंदोलन का मन बना चुके हैं।

सब्जी उत्पादक क्षेत्र जनता, बोहरू व वलनी के काश्तकारों को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने को वर्ष 2007 में अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर नावली क्षेत्र में कोसी नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से लिफ्ट सिंचाई योजना तैयार की गई। योजना से महज वलनी गाव में ही सिंचाई का पानी पहुंच पाया। हालाकि जनता व बोहरु गाव तक भी सिंचाई योजना के पाइप पहुंचा दिए गए पर टैंक का निर्माण नहीं किया गया। टैंक न होने के कारण सीधे पाइप से खेतों में पहुंचे पानी के तेज बहाव ने किसानों के खेत बर्बाद कर दिए।

जनता व बोहरू गांव के ग्रामीणों का कहना है कि चौंदह वर्ष बीतने के बावजूद टैंक का निर्माण नहीं किया गया। जिस कारण उन्हें सिंचाई योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। कहा कि ग्रामीण सब्जी उत्पादन के लिए आज भी वर्षा पर निर्भर हैं। ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह रावत, कुंवर सिंह, रूप सिंह, दलीप सिंह, राजेंद्र सिंह, पान सिंह, ईश्वर सिंह, लक्ष्मण सिंह, बिशन सिंह, पूरन सिंह आदि ने शीघ्र टैंक निर्माण न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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