संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा: छात्रा के उत्पीड़न प्रकरण में बर्खास्त प्रधानाध्यापिका का भविष्य अब न्यायालय तय करेगा। विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत में पॉक्सो एक्ट में दोषी करार प्रधानाध्यापिका फिलहाल उच्च न्यायालय से जमानत पर हैं। संबंधित विभागीय अधिकारियों के अनुसार यदि प्रधानाध्यापिका को अदालत अपराध मुक्त हो जाती है तो वह अपना प्रत्यावेदन विभाग को कर सकती हैं।

मामला वर्ष 2018 का है। प्राथमिक विद्यालय बैगनियां (लमगड़ा ब्लाक) की तत्कालीन प्रधानाध्यापिका दया श्यालाकोटी व एक सहायक अध्यापक को छात्रा के उत्पीड़न पर निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ। विभागीय सूत्रों के अनुसार सहायक अध्यापक जेल में है। उसे पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। दूसरी तरफ विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बर्खास्त प्रधानाध्यापिका को पॉक्सो एक्ट को दोषी पाया। यह मामला उच्च न्यायालय में चला गया। जहां से प्रधानाध्यापिका जमानत पर हैं। इधर संबधित विभाग ने उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली-2003 के तहत कार्रवाई करते हुए प्रधानाध्यापिका को बर्खास्त कर दिया है। चूंकि पॉक्सो एक्ट का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, लिहाजा विभाग का मानना है कि यदि उन्हें वहां से राहत मिल जाती है तो वह प्रत्यावेदन संबंधित विभाग को कर सकती हैं।

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उत्तराखंड सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली के उल्लंघन पर प्रधानाध्यापिका की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। यदि वह (प्रधानाध्यापिका) अदालत से अपराध मुक्त हो जाती हैं तो वह अपना प्रत्यावेदन विभाग को कर सकती हैं। गुणदोष के आधार पर उसे सेवा में लिए जाने पर विचार किया जाएगा।

- हर्ष बहादुर चंद, मुख्य शिक्षाधिकारी, जनपद अल्मोड़ा

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