संस, रानीखेत : 'हर घर को नल से जल' योजना पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। विधायक व उपनेता प्रतिपक्ष करन सिंह माहरा का आरोप है कि पाइप मानक से सस्ते व गुणवत्ताहीन बिछाए गए हैं। वहीं पाइपों को डेढ़ से दो फीट गहरे में दबाने के बजाय जंगल में खुले बिछा दिए गए हैं। इससे वनाग्नि व अन्य कारणों से उन्हें क्षति पहुंच सकती है। शिकायत पर संयुक्त मजिस्ट्रेट व ईई जल निगम ने पंत कोटली क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। यहां एक दो जगह गड़बड़ी पाई मिली। संयुक्त मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उधर विभाग ने कहा कि धांधली के आरोप निराधार हैं।

पंत कोटली क्षेत्र में 'हर घर को जल से जल' योजना के तहत पाइप लाइन बिछाई गई हैं। उपनेता प्रतिपक्ष करन सिंह माहरा ने शुक्रवार को इस मामले में जांच की मांग उठाते हुए आरोप लगाया कि पाइपों की गुणवत्ता बेहद निम्न है। वह संयुक्त मजिस्ट्रेट अपूर्वा पांडे व ईई जल निगम आरआर वर्मा को संयुक्त निरीक्षण के लिए मौके पर ले गए। उनका तर्क था कि पाइप डेढ़ फीट गहरे में दबाने चाहिए मगर जंगल में खुले छोड़े गए हैं। यह भी आरोप लगाए कि पाइप 350 रुपये के बजाय 80 रुपये प्रति किलो वाले लगाए गए हैं, जिनकी गुणवत्ता निम्न है।

निरीक्षण के दौरान गांव की तरफ तो पाइपलाइन ठीक ठाक मिली मगर स्रोत से प्लास्टिक के पाइप खींचे गए थे। इधर संयुक्त मजिस्ट्रेट ने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है। इसके बाद ही खुलासा होगा कि अनियमितता है या नहीं।

========= हर घर को नल से जल योजना में पाइपों की गुणवत्ता घटिया है। पंत कोटली ही नहीं सभी पर्वतीय क्षेत्रों में जांच होनी चाहिए। यह मामला कल (शनिवार को) मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया जाएगा कि सरकारी बजट का कैसे दुरुपयोग किया जा रहा है। पाइप डेढ़ फीट गहरे में नहीं दबाए गए हैं। फायर सीजन में आग लगी तो प्लास्टिक के खुले पाइप गल जाएंगे।

- करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष'

======== आरोप निराधार हैं। जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक धर तक लाइन बिछाने के लिए 7500 रुपये की लागत तय की गई है। जहां दूरी अधिक है, वहां लागत कम करने के लिए एचडीपीई पाइप बिछाए गए हैं। एक दो स्थानों पर गहराई कम थी। जेई व ठेकदार को निर्देशित किया गया है।

- आरआर वर्मा, ईई जल निगम

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