संस, अल्मोड़ा/जैंती : स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में देश को 'जय हिंद' का नारा देने वाले सालम क्रांति के नायक क्रांतिकारी स्व. रामसिंह धौनी को उनके 125वें जन्म दिन पर याद किया गया। जगह जगह आयोजित गाेिष्ठयों में वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. धौनी देशभक्त ही नहीं, सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकता के प्रबल पक्षधर भी रहे। उन्होंने कुमाऊं में गोरों के खिलाफ जंग में हरेक वर्ग के लोगों को साथ लिया।

सालम समिति की ओर से जिला पंचायत परिसर में बुधवार को क्रांतिकारी स्व. राम सिंह धौनी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित किए गए। मुख्य अतिथि उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड उपाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल ने कहा कि स्व. धौनी ने सालम ही नहीं बल्कि क्रांति के बूते देश में ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करने का प्रयास किया। स्व. धौनी ने डिप्टी कलक्टर का पद ठुकरा स्वतंत्रता आंदोलन का सिपाही बनना सही समझा। उन्होंने समिति को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। विशिष्ट अतिथि पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि स्व. धौनी ने देश की आजादी के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में जो अतुलनीय कार्य किए वह पहाड़ में मील का पत्थर साबित हो रहे। अगुवाई वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद लाल वर्मा एवं संचालन समिति अध्यक्ष राजेंद्र रावत ने की। इस दौरान विशिष्ट अतिथि महिला काग्रेस अध्यक्ष लता तिवारी, कर्मचारी नेता चंद्रमणि भट्ट, एमसी काडपाल, गिरीश चंद्र मल्होत्रा, समिति उपाध्यक्ष गोपाल सिंह मेहरा, महासचिव अमरनाथ सिंह रजवार, एलएम भट्ट, विपिन जोशी, आरएस बिष्ट, जीएस नेगी, विनोद जोशी, नवीन चंद्र पाठक, उलोवा के दया कृष्ण काडपाल, एसएस चिलवाल, भगवत टंगढि़या, चंदन कुमार, बीसी पाठक, अनिल मेर, मनोज पाडे, प्रकाश बिष्ट, दीपक बिष्ट, अनिल धामी, बीसी पाठक, गोविंद बिष्ट, बसंत सिंह जीना, धीरेंद्र धौनी आदि मौजूद रहे।

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लमगड़ा ब्लाक के पहले स्नातक थे स्व. धौनी

अल्मोड़ा: स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह धौनी ट्रस्ट के तत्वावधान में सिकुड़ा तिराहा पर क्रांतिकारी राम सिंह धौनी पार्क में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की जयंती धूमधाम से मनाई गई। आचार्य नरेंद्रदेव शिक्षा निकेतन के बच्चों ने देशभक्ति कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि चाय विकास बोर्ड उपाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल ने कहा कि स्व. धौनी ने साहित्य समिति के जरिये देश में जनचेतना का संचार किया। वह अल्मोड़ा जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर भी रहे। छोटी उम्र से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले क्रांतिकारी ने गोरों व तपेदिक रोग से लड़ते रहे। गुलामी के दौर में राम सिंह धौनी लमगड़ा ब्लाक क्षेत्र के पहले स्नातक विद्यार्थी थे। तपेदिक महामारी के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में जनसेवा की। बाद में अल्पायु में खुद भी तपेदिक की चपेट में आ गए। विशिष्ट अतिथि पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि ब्रितानी हुकूमत स्व. धौनी इतने खौफजदा हो गए थे कि उनके साहित्य पर ही प्रतिबंध लगा दिया था। अध्यक्षता शिक्षाविद् आनंद सिंह ऐरी व संचालन ट्रस्ट सचिव भूपेंद्र सिंह नेगी ने किया। इस मौके पर ग्राम प्रधान प्रशांत पंवार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीसी जोशी, प्रताप सिंह सत्यपाल, भगवती परिहार, हयात सिंह गैड़ा, राजुल बसंल, दयाकृष्ण कांडपाल, अधिवक्ता गोविंदलाल वर्मा, राम सिंह बिष्ट, शांति आर्या, गोपाल सिंह चम्याल, ललित मोहन, जसौद सिंह बिष्ट, हीरा सिंह फत्र्याल, पूरन सेन, चंदन सिंह पवार, लक्ष्मण भोज, ललित बिष्ट, जमन सिंह देवड़ी, भानु प्रताप ऐरी, अनिल धामी, गोपाल नयाल आदि मौजूद रहे। उधर क्रांतिकारी के पैतृक गांव बिनौला में उनके पौत्र जगदीश सिंह धौनी के नेतृत्व में गोष्ठी हुई।

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