संस, स्याल्दे (अल्मोड़ा) : अश्व प्रजातियों के जरिये आय बढ़ाने के गुर यहां ग्रामीणों को सिखाए गए। पशु पालकों की माली हालत सुधारने के मकसद से पहली बार आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि यदि अश्व प्रजातियों की सेहत व पोषण पर ध्यान दिया जाए तो पशुपालक आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

ब्लाक सभागार में संजीवनी संस्था व द डौंकी सेंचुरी यूनाइटेड किंगडम की संयुक्त पहल पर अश्व प्रजाति पालकों की कार्यशाला हुई। मुख्य अतिथि पशु चिकित्साधिकारी डा. डीएस मर्तोलिया ने अश्व प्रजाति के पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल व उनके बीमा पर खास जोर दिया। ताकि आर्थिक हानि से बचा जा कसे। विभिन्न सरकारी योजनाएं गिनाई। पहली बार किसी गैरसरकारी संस्था की ओर से अश्व प्रजाति के कल्याण को किए जा रहे कार्यो को सराहनीय बताया।

परियोजना प्रबंधक संजीवनी सिल्का सिंह ने कोविड-19 के आपातकालीन फंड के बारे में बताया। मुख्य कार्यकारी महेश घुघत्याल ने द डौंकी सेंचुरी यूनाइटेड किंगडम की उपलब्धियां व मकसद से रू ब रू कराया। कहा कि डौंकी सेंचुरी अश्व प्रजाति के पशुओं व उनके पालकों के कल्याण को 1969 से दुनियाभर में कार्य कर रही है। प्रमुख सलाहकार डा. रमेश सिंह बिष्ट ने पशुओं की सेहत के साथ पोषण पर जोर दिया। क्षमता से अधिक कार्य न लेने व आराम देने की भी सलाह दी। चारे के रूप में डायट्रीफाइबर, खनिज व विटामिंस वाले अजोलाफर्न के इस्तेमाल पर जोर दिया। कहा कि संजीवनी संस्था माडल के तौर पर अजोला उत्पाद इकाइया लगाएगी। मानव संसाधन प्रमुख नीरज बिष्ट ने बताया कि अश्वपालकों की मदद को संस्था काम करती है। कार्यशाला में सल्ट व स्याल्दे ब्लाक के 25 से ज्यादा गांवों के 48 अश्वपालकों ने हिस्सा लिया। संचालन प्रबंधक डा. केएस रावत ने किया। हेमचंद्र सिंह, रवींद्र सिंह रावत ने भी विचार रखे।

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