संस, अल्मोड़ा : जिला मुख्यालय के महिला चिकित्सालय में एक और प्रसूता ने दम तोड़ दिया। सामान्य प्रसव के जरिये उसने बच्ची को जन्म दिया, कुछ देर बाद ही उसकी हालत बिगड़ती चली गई। नतीजतन, जच्चा बच्चा के बीच नाता पौना घंटे तक ही जिंदा रह सका। प्रसूता की मौत से पहाड़ की स्वास्थ्य सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई।

सोमेश्वर तहसील के ताकुला ब्लाक स्थित खीराकोट गांव के कैलाश सिंह भाकुनी की गर्भवती पत्नी दुर्गा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सोमेश्वर ले जाया गया। चिकित्सकों ने उसे जिला मुख्यालय स्थित महिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया। स्वजन उसे यहां लेकर पहुंचे। प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को भर्ती कर लिया गया। कुछ समय बाद उसने बेटी को जन्म दिया। प्रभारी मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. प्रीति पंत के मुताबिक सामान्य प्रसव के बाद प्रसूता को जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। मगर थोड़ी देर के बाद उसकी तबियत बिगड़ने लगी। इस पर चिकित्सकों की टीम ने उपचार शुरू किया। जीवनरक्षक दवाएं देने के साथ ही खून भी चढ़ाया गया। मगर पौना घंटे बाद ही प्रसूता ने दम तोड़ दिया। जिला मुख्यालय के चिकित्सालय में एक और प्रसूता की मौत से व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

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'बच्ची को जन्म देने के बाद प्रसूता दुर्गा को जनरल वार्ड में भर्ती कर लिया गया था। बाद में अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। पल्स रेट गड़बड़ा गया और रक्तचाप भी गिर गया था। इसे मेडिकल साइंस में पलमोनरी इंबोलिज्म कहा जाता है। इसमें रिकवर होना बहुत मुश्किल होता है। इसके बावजूद हमने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया लेकिन नहीं बचा सके।

- डा. प्रीति पंत, प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक महिला अस्पताल'

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