संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : देघाट (सल्ट ब्लॉक) में धर्मस्थल परिसर में लगा विशाल प्राचीन वटवृक्ष के साथ ही आम के तीन पेड़ काट गिराए जाने के मामले में वन विभाग ने मंदिर कमेटी से 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अर्थदंड की यह राशि बकायदा वसूल भी कर ली गई है।

मामला बीती सात अक्टूबर का है। देघाट स्थित मा भगवती देवी मंदिर परिसर में सुंदरीकरण की आड़ में विशालकाय वटवृक्ष पर आरी चला दी गई। यही नहीं, परिसर में लगे आम के तीन पेड़ भी काट गिराए थे। इससे खूब हो-हल्ला मचा। गोपनीय शिकायत पर वन क्षेत्राधिकारी जौरासी मोहन राम आर्या मय टीम पहुंचे। मौके पर पड़ी करीब 60 कुंतल लकड़ी अपनी सुपुर्दगी में ले ली गई। साथ ही मंदिर कमेटी अध्यक्ष किशन सिंह मैठाड़ा के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। साथ ही कमेटी की जमीन पर बगैर विभागीय अनुमति के पेड़ काट गिराए जाने पर प्रति वृक्ष पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। इधर, डीएफओ कुंदन कुमार के अनुसार जिस स्थान पर हरे-भरे पेड़ काट गिराए गए हैं, वह जमीन कमेटी के अधीन है। लिहाजा विभागीय एक्ट के तहत क्षतिपूरक पौधरोपण के बजाय केवल जुर्माना ही लगाया जा सकता है। 20 हजार रुपया बतौर अर्थदंड वसूल कर लिया गया है।

========पैकेज ===========

क्षति पहुंचाने वाले लोनिवि ने नहीं भरा जुर्माना

::: आमने सामने :::

= सप्ताहभर की मोहलत पूरी होने पर वन विभाग कड़क, भेजेगा नोटिस

= आरओ ने कहा, हीलाहवाली पर उठाएंगे कड़ा कदम

= ईई बोले, पंचायत चुनाव की मतगणना के बाद ही देंगे जवाब

अल्मोड़ा : सड़क कटान में निकला कई टन मलबा रामगंगा नदी में फेंकने व वन संपदा को भारी नुकसान पर पहुंचाने के मामले में लोनिवि (प्रांतीय खंड) को वन विभाग अब चेतावनी नोटिस की तैयारी में है। एक सप्ताह के भीतर बतौर जुर्माना 9.29 लाख रुपये अदा करने के लिए विभाग ने लोनिवि को एक सप्ताह की मोहलत दी थी। मगर मियाद पूरी होने पर वन विभाग ने कड़ा रुख अपना लिया है। उधर ईई लोनिवि ने चुनावी व्यस्तता का हवाला देते हुए कहा कि 21 को मतगणना के बाद ही नोटिस का जवाब दिया जाएगा।

बताते चलें कि ऊणी महादेव (ताड़ीखेत) को भिक्यासैंण व मरचूला से सीधा जोड़ने के लिए वर्ष 2017 में सड़क को स्वीकृति मिली थी। आरोप है कि कार्यदायी विभाग लोनिवि (प्रांतीय खंड) ने मरचूला के पास इसके लिए पहाड़ी का कटान कर कई टन मलबा रामगंगा नदी में गिरा दिया। इससे पान का प्राकृतिक प्रवाह तो थमा ही, जिस वन भूमि से मिट्टी व पत्थर गिराए गए उससे 0.5 हेक्टेयर में बड़े पैमाने पर वन संपदा को भी क्षति पहुंची। इस पर विभाग ने लोनिवि पर 9.29 लाख रुपये का जुर्माना ठोका था। मगर आरोपित विभाग की ओर से अर्थदंड की राशि अब तक रेंज अथवा डीएफओ कार्यालय में जमा न किए जाने पर चेतावनी नोटिस भेजा जा रहा है।

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'लोनिवि प्रांतीय खंड को एक सप्ताह का वक्त दिया गया था लेकिन इस अवधि में जुर्माना अदा नहीं किया गया। इस पर चेतावनी नोटिस भेज आगाह किया जा रहा है। इस पर भी जुर्माना न भरा गया तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाएंगे। वन संपदा को क्षति पहुंचाने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।

- मोहन राम आर्या, वन क्षेत्राधिकारी जौरासी रेंज'

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'माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नवंबर तक हर हाल में रामगंगा नदी में गिराया गया मलबा हटा दिया जाएगा। जहां तक वन विभाग के जुर्माने का सवाल है, हमारा पूरा स्टाफ त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में व्यस्त है इसलिए 21 अक्टूबर को मतगणना के बाद ही नोटिस का जवाब दिया जाएगा।

- कुंदन बिष्ट, ईई लोनिवि प्रांतीय खंड'

Posted By: Jagran

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