वाराणसी, जेएनएन। लोहता थाना क्षेत्र बखरिया गांव निवासी अनुराग सिंह ने शुक्रवार को शिकायत पर सुनवाई न होने पर पीएमओ जनसंपर्क कार्यालय के गेट विषाक्त पदार्थ खा कर आत्महत्या की कोशिश की है। कार्यालय सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने बीएचयू में उपचार के लिए भर्ती कराया।  जहां अब चिकित्सकों ने हालत स्थिर बताई जा रही है। अनुराग का आरोप है कि एक एजेंसी को पैसे देने के बाद भी उसका ट्रैक्टर नहीं मिला। इसको लेकर वह एक साल से इधर-उधर भटक रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। साथ ही पत्नी को जहर देकर मारने का भी आरोप लगाया है।

अनुराग सिंह (40) अपने नाना शोभनाथ सिंह के घर पर रहता है। बीए की पढ़ाई करने के बाद उसकी शादी रेखा रानी सिंह से हुई थी। उसके दो पुत्र गोलू सिंह (14) कक्षा आठ और छोटा पुत्र छोटेश्वर सिंह कक्षा तीन में पढ़ाई करता है। वह अपने नाना का खेती का काम करने के अलावा उनको मिलने वाले पेंशन से जीविकोपार्जन करता है। अनुराग को रोजगार दिलाने के लिए शोभनाथ ने ट्रैक्टर खरीदने के लिए 80 हजार रुपये दिया। उन पैसों को अनुराग ने हरहुआ क्षेत्र में किसी ट्रैक्टर एजेंसी के मैनेजर को दिया। बाद में जब वह ट्रैक्टर की मांग करने लगा तो मैनेजर टरकाने लगा। इसी दौरान उसकी पत्नी रेखा रानी की संदिग्ध परिस्थितियों में बीएचयू अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अनुराग का आरोप है कि उसकी पत्नी को कुछ लोगों ने विषाक्त पदार्थ देकर मार दिया। इसकी जांच और ट्रैक्टर मैनेजर से पैसा वापसी कराने की मांग को लेकर बीते एक साल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों को पत्रक दिया। बावजूद इसके कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। एक सप्ताह पूर्व भी उसने एजेंसी मैनेजर से पैसे की मांग की। इस पर मैनेजर ने पैसा भी नहीं दिया और पिटाई करने के बाद चार पहिया वाहन दाएं पैर पर चढ़ा जान से मारने की कोशिश की। इसकी शिकायत पीएम जनसंपर्क कार्यालय में पिछले सप्ताह किया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे क्षुब्ध होकर अपने दोनों बेटे गोलू, छोटेश्वर व नानी ब्रजबाला देवी के साथ शुक्रवार दोपहर रवींद्रपुरी स्थित कार्यालय पहुंचा। वहां कार्यालय  पत्रक सौंपने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता देख कार्यालय के गेट पर अपने जेब मे रखा विषाक्त

पत्नी की मौत के बाद विक्षिप्त हो गया था अनुराग

बखरिया निवासी स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त शोभनाथ सिंह की तीन बेटियां थी। इसमें सबसे बड़ी बेटी मिर्जामुराद के दुधवा गांव की रहने वाली चंद्रप्रभा के दो बेटे हैं। इसमें छोटा बेटा अनुराग जन्म से ही अपने नाना के घर पर रहता था। अनुराग की नानी ब्रजबाला देवी (80) ने बताया कि अनुराग की पत्नी रेखारानी की मौत एक वर्ष पूर्व हो गई थी। इसके बाद से वह विक्षिप्त हो गया। वह ट्रैक्टर के लिए पहले 50 हजार रुपया और फिर 30 हजार रुपये दिया था। पैसा मांगने पर  मैनेजर ने गाली-गलौज व मारपीट की।

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