सावन अमावस्या पर यादव बंधुओं ने किया बाबा का जलाभिषेक, गंगा पार कर पहुंचे, परंपरा का किया निवर्हन
सावन अमावस्या पर गंगा पार ग्राम कटेसर के यादव बंधुओं ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा का जलाभिषेक किया। डमरू ...और पढ़ें

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सावन अमावस्या पर यादव बंधुओं ने किया जलाभिषेक।
गंगा पार कर पहुंचे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर।
डमरू और जयकारों से गूंजा पूरा क्षेत्र।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। देवाधिदेव महादेव के अतिप्रिय सावन मास में भक्ति और लोक परंपरा का संगम हो रहा है। सावन अमावस्या पर बुधवार को परंपरा का निवर्हन करते हुए गंगा पार ग्राम कटेसर के यादव बंधुओं ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया।
हाथ उठाकर जयकारे लगाते हुए यादव बंधु बाबा दरबार की ओर बढ़े तो उत्साह और भक्तिभाव का अलौकिक दृश्य विद्यमान हुआ।
नाव से गंगा पार कर यादव बंधु दशाश्वमेघ घाट पहुंचे। चितरंजन पार्क के पास से यादव बंधुओं ने शोभायात्रा शुरू की। डमरू के निनाद और हर हर महादेव के गगनभेदी जयकार लगाते हुए हाथों में जलपात्र लेकर आगे बढ़े तो पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर यादव बंधुओं ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
यादव बंधुओं के जलाभिषेक को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने चाक- चौबंद इंतजाम किए थे। आम श्रद्धालुओं का दर्शन पूजन प्रभावित न हो इसलिए यादव बंधुओं को एक द्वार से प्रवेश कराया गया।
विश्वेश्वर दर्शन कर चलो मन काशी... से भाव विभोर हुए श्रोता
सुबह ए बनारस के मंच पर पुणे के कलाकर अभेद अभिषेकी ने राग भैरव में मध्य तीनताल मे निबद्ध बंदिश में प्रभु दाता सबन के...व शिव भजन विश्वेश्वर दर्शन कर चलो मन काशी... सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला संगति पंकज राय व संवादिनी पर डा. पंकज शर्मा ने की। कलाकार को प्रमाण पत्र पुनीत गुप्त ने दिया। अतिथियों को डा. रत्नेश वर्मा ने स्मृति पत्रिका प्रदान किया।
सुगंधित फूलों से सजा श्रीदक्षिणमुखी हनुमान दरबार
वाराणसी: राजमंदिर स्थित अति प्राचीन श्रीदक्षिण मुखी हनुमान जी का वार्षिक हरियाली श्रृंगार व जलविहार उत्सव बुधवार को भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। मंदिर प्रांगण को गुलाब, गेंदा, नीलकंठ और कामिनी की पत्तियों समेत विभिन्न सुगंधित फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया। प्रांगण 'जय श्री राम' और 'जय हनुमान' के जयकारों से गुंजायमान रहा।
अरुणोदय काल में प्रभु हनुमान जी को पंचामृत एवं पंचमेवा स्नान कराया गया। इसके बाद अलौकिक श्रृंगार कर विशेष भोग अर्पित की गई। महंत सुनील दुबे ने बताया कि बाबा के मनोरम रूप के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं। दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रात्रि तक लगी रही।
