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विश्व रेबीज दिवस : रेबीज से संक्रमित मरीज के लिए पूर्वांचल के किसी भी सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं

By Shivam SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 27 Sep 2026 12:39 PM (IST)

सरकारी अस्पतालों में रेबीज संक्रमित मरीजों के लिए उचित सुविधाओं की भारी कमी है, खासकर लक्षण दिखने के बाद। पूर्वांचल ...और पढ़ें

विश्व रेबीज दिवस: पूर्वांचल के सरकारी अस्पतालों में रेबीज संक्रमित मरीजों के लिए गंभीर सुविधाओं का अभाव।

विश्व रेबीज दिवस: पूर्वांचल के सरकारी अस्पतालों में रेबीज संक्रमित मरीजों के लिए गंभीर सुविधाओं का अभाव।

HighLights

  1. रेबीज संक्रमित मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी।

  2. लक्षण दिखने के बाद रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन, विशेष वार्ड अनुपलब्ध।

  3. पूर्वांचल के अस्पतालों में पैलिएटिव केयर और वेंटिलेटर की कमी।

शिवम सिंह, जागरण, वाराणसी। रेबीज से संक्रमित मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में उचित सुविधाओं की भारी कमी है। लक्षण दिखने के बाद इलाज न होने से मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है। पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, मंडलीय चिकित्सालय, लाल बहादुर शास्त्रीय समेत किसी भी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) तो मिल जाता है, लेकिन रेबीजइम्यूनोग्लोबुलिन(आरआइजी) और गंभीर मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड या सपोर्टिव केयर की व्यवस्था नदारद है।

कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने के तुरंत बाद पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलेक्सिस(पीईपी) तो कई जगह उपलब्ध है, लेकिन लक्षण शुरू होने के बाद रेबीज लगभग 100 प्रतिशत घातक हो जाता है। ऐसे में दर्द निवारक दवाएं, वेंटिलेटर सुविधा और पेैलिएटिव केयर की जरूरत पड़ती है, लेकिन पूर्वांचल समेत प्रदेश के लगभग सरकारी अस्पतालों में अपर्याप्त है।

बीते 22 अगस्त को लोहता क्षेत्र स्थित बनकट फाटक के पास आवारा कुत्ते ने सात वर्षीय मासूम बच्ची सायबा को काट लिया। पिता शोएब खान ने बताया कि 22 अगस्त को घर के बाहर खेल रही सायबा पर अचानक एक आवारा कुत्ते ने हमला बोल दिया था। कुत्ते ने उसे जमीन पर घसीटते हुए चेहरे, आंख और शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें पहुंचाईं।

स्थानीय लोगों ने बच्ची को इलाज के लिए मंडलीय चिकित्सालय कबीरचौरा पहुंचाया। वहां रेबीज के तीन इंजेक्शन लगाए गए। चौथा इंजेक्शन सोमवार को लगना था लेकिन इससे पहले ही स्थिति खराब होती गई। कुत्ते की तरह भौंकने लगी थी, 22 सितंबर को रेबीज से संक्रमित मरीजों के लिए पैलिएटिव वार्ड न होने से मौत हो गई।

इस तरह सात जुलाई 2026 को गाजीपुर के ताजपुर माझा गांव के 48 वर्षीय अजय कुमार को रेबीज संक्रमण होने पर मौत हो गई थी। इनके केस में स्वजन मंडलीय चिकित्सालय, पं. दीनदयाल उपाध्याय और बीएचयू समेत विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भर्ती के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो गए थे। सभी जगहों पर पैलिएटिव वार्ड न होने का हवाला देकर रेफर कर दिया।

अंत में स्वजन ठक हारकर घर में ही एक कमरे में बंद रखा था। असहनीय दर्द से मरीज की मौत हो गई। स्वजन का आरोप था कि पैलिएटिव केयर (गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को दर्द, तनाव और अन्य शारीरिक-मानसिक लक्षणों से राहत दिलाने वाली एक विशेष चिकित्सा सेवा) भी नहीं मिला। 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है लेक‍िन पूर्वांचल में रेबीज से मौतों के बाद भी कोई पर‍िणाम जनह‍ित में नजर नहीं आता है। 

रेबीज प्रबंधन में बड़ी खामी

कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने के तुरंत बाद पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलेक्सिस (पीईपी) उपलब्ध है और एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) कई केंद्रों पर मिल जाती है, लेकिन लक्षण प्रकट होने के बाद रेबीज लगभग 100 प्रतिशत घातक हो जाता है। ऐसे में दर्द निवारक दवाएं, वेंटिलेटर सपोर्ट और आइसोलेशन वार्ड की जरूरत पड़ती है, जो पूर्वांचल के वाराणसी, मीरजापुर और आजमगढ़ मंडल के सरकारी अस्पतालों में नदारद है। बीएचयू ट्रामा सेंटर में बाइट के शुरुआती मामलों के लिए सुविधा है, मगर सिम्पटोमैटिक मरीजों के लिए अलग व्यवस्था नहीं है। बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते ऐसे मरीजों को अक्सर रेफर किया जाता है।

रेबीज संक्रमित मरीजों के लिए व्यवस्था बनाई जा सके। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया जा रहा है जिससे आगे चलकर कम से कम मरीज को भर्ती कर कुछ राहत प्रदान किया जा सके।

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डा. एनपी सींह, सीएमओ वाराणसी।