बनारस रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर महिला और पुरुष शौचालय में कार्य प्रगति पर है, व्यवस्थाएं नहीं हो पा रहीं दुरुस्त
बनारस स्टेशन पर निशुल्क शौचालय गंदगी और बंद होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा ...और पढ़ें

बनारस स्टेशन पर शौचालयों की बदहाली से यात्री परेशान गंदगी और बंद पड़े शौचालय।
HighLights
बनारस स्टेशन पर निशुल्क शौचालय गंदगी से बजबजा रहे या बंद हैं।
प्लेटफार्म एक और द्वितीय प्रवेश द्वार के शौचालय लंबे समय से बंद।
हजारों यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पूर्वोत्तर रेलवे का चमकदार बनारस स्टेशन (मंडुवाडीह) बुनियादी सुविधाओं के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है। स्टेशन पर यात्रियों के लिए बनाए गए प्लेटफार्म न दो पर निशुल्क शौचालय गंदगी से बजबजा रहा हैं। इससे प्रतिदिन यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार के पास बना यात्री शौचालय लंबे समय से बंद पड़ा है। प्लेटफार्म न एक पर भी शौचालय बना है लेकिन वह काफी दिनों से बंद पड़ा है वहां सिर्फ कार्य प्रगति का बोर्ड लगा कर खानापूर्ति कर दी गई है। कब तक कार्य पूरा होगा, इसकी कोई जानकारी बोर्ड पर नहीं है।
प्लेटफार्म नंबर एक व आठ बनारस स्टेशन का सबसे व्यस्त प्लेटफार्म है, जहां से अधिकांश ट्रेनों का संचालन होता है। ऐसे में यहां शौचालय बंद होने से यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। बुजुर्ग, महिला और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
प्लेटफार्म नंबर दो-तीन की स्थिति और भी बदतर है। यहा शौचालय चालू तो है, लेकिन साफ-सफाई के अभाव में नरक बना हुआ है। अंदर गंदगी का अंबार लगा है और बदबू के कारण वहां खड़ा होना भी मुश्किल है फर्श पर गंदगी फैली हुई है।
यात्री आकाश सिंह ने बताया कि यहां शौचालय में इतनी गंदगी है कि उपयोग करना मुश्किल है। यह स्टेशन की सुंदरता को भी बिगाड़ रहा है। रेलवे ने अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन को सुंदर बनाया है, लेकिन शौचालयों की गंदगी उसकी चमक को फीका कर रही है।
द्वितीय प्रवेश द्वार की तरफ भी यही हाल है। प्रवेश द्वार के पास बना शौचालय बंद पड़ा है, जबकि दूसरी छोर पर बना शौचालय चालू है। ऐसे में प्रवेश द्वार से आने वाले यात्रियों को शौचालय के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार ट्रेन छूटने की जल्दी में यात्री परेशान हो जाते हैं।
बनारस स्टेशन वाराणसी का दूसरा सबसे बड़ा स्टेशन है, जहां से लगभग 30 जोड़ी ट्रेनें चलती हैं और रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है। इतने बड़े स्टेशन पर निश्शुल्क शौचालय की व्यवस्था खराब होना रेल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। मजबूरन यात्रियों को पेड शौचालय का सहारा लेना पड़ रहा है। गरीब और सामान्य यात्री इसके लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने को मजबूर हैं।
यात्रियों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़े शौचालयों को जल्द से जल्द चालू कराया जाए और चालू शौचालयों में साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था की जाए, ताकि यात्रियों को स्वच्छ और निशुल्क सुविधा मिल सके। इस संदर्भ में डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे आशीष जैन को फ़ोन करने पर उनका फोन नही उठने से संपर्क नहीं हो सका।
बनारस स्टेशन के प्लेटफार्म पर आवारा कुत्तों का डेरा, यात्रियों में दहशत
पूर्वोत्तर रेलवे के महत्वपूर्ण बनारस स्टेशन (मंडुवाडीह) पर इन दिनों यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ सुविधा पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्टेशन के प्लेटफार्मों पर आवारा कुत्तों ने डेरा जमा लिया है, जिससे यात्रियों में दहशत का माहौल बना हुआ है। बताया जा रहा है कि प्लेटफार्म नंबर एक से लेकर आठ तक दिनभर आवारा कुत्तों का झुंड घूमता रहता है।
प्लेटफार्म पर बैठे यात्रियों के आसपास कुत्ते मंडराते रहते हैं। कई बार तो दो कुत्तों के आपस में भौंकने और लड़ने से अफरा-तफरी मच जाती है। इससे वहां मौजूद महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग यात्री काफी डर जाते हैं। रात के समय तो इनकी संख्या और भी बढ़ जाती है। ये कुत्ते प्लेटफार्म पर लगी बेंचों के नीचे, वेटिंग हॉल के पास और फूड स्टॉल के आसपास बैठे रहते हैं।
