वाराणसी, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी से दुनिया का कोई भी देश अछूता नहीं रहा। इसकी वजह से कई देशों को लाकडाउन लगाना पड़ा, जिससे लोग घरों में कैद हो गए। उन्हें आफिस का काम घर से ही करना पड़ा। अब वर्क फ्रॉम होम की परंपरा शुरू हो गई। कोरोना की वजह से काफी दिनों तक स्कूल- कालेज और कोचिंग इंस्टीट्यूट भी बंद रहे। कई राज्यों में तो अभी तक शिक्षण संस्थान नहीं खोले गए हैं। ऐसे में घर पर पढ़ाई का भी दिनोंदिन चलन बढ़ गया है। ऐसे में बड़ी स्क्रीन वाले डिवाइसेज की मांग इस अवधि में अचानक बढ़ गई। इसी वजह से लैपटॉप के साथ स्मार्ट फोन काफी बिक्री हुई। लैपटॉप की बिक्री ने तो कोरोना काल में रिकार्ड ही तोड़ दिया।

घर पर काम और पढ़ाई की वजह से बनारस में भी पर्सनल कंप्यूटर की बिक्री अचानक से बढ़ गई। एक अनुमान के मुताबिक बीते वर्ष जुलाई माह से दिसम्बर के दौरान पर्सनल कंप्यूटर की बिक्री 50 हजार से एक लाख रही। व्यापारियों की माने तो कमर्शियल सेगमेंट में बहुत ही कम सरकारी और शिक्षण उत्पाद थे, जबकि उपभोक्ता सेगमेंट में रिकॉर्ड कंप्यूटर बेचे गए।

दरअसल कोरोना की वजह से देश में 2020 मार्च महीने में ही लॉकडाउन लगा दिया गया था। ऐसे में अप्रैल-जून के दौरान ही डेस्कटॉप, नोटबुक्स और वर्क स्टेशन की मांग में रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई थी। इसकी वजह यह थी कि लॉकडाउन लगते ही कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम हो गए थे। ऐसे में बड़ी मात्रा में कंप्यूटर्स की खरीदारी हुई। वहीं दूसरी तिमाही यानि जुलाई—सितंबर में भी यह सिलसिला जारी रहा। सालाना आधार पर बिक्री 40 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ी।

विक्रेता आशुतोष अग्रवाल के अनुसार स्कूलों और कालेजों ने आनलाइन कक्षाएं जारी रखीं। इसकी वजह से नोटबुक्स की मांग में जबरदस्त तेजी रही। इसकी मांग बड़े शहरों में ज्यादा रही। दूसरी ओर नोटबुक पीसी की मांग आपूर्ति से ज्यादा रही है। ब्रांडेड स्मार्ट फोन की बिक्री भी सालाना आधार पर 20 फीसदी बढ़ी है। वहीं बड़ी स्क्रीन के डिवाइसेज की मांग के चलते टैबलेट की बिक्री में जबरदस्त इजाफा रहा।

Edited By: Abhishek Sharma