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सोनभद्र, जेएनएन। वाराणसी से विभिन्न सामाजिक संगठनों की टीम आई थी, टीम में महिलाएं भी थीं। जब एक-एक मृतकों के घर में जाकर महिलाएं स्थिति से रूबरू हो रही थीं तो घटना को बताते ही पीडि़त महिलाएं फफक पड़ीं। हालांकि अपना पल्लू संभालते हुए एक हाथ से आंसू पोछा और शुरू कर दी पूरी कहानी बताना। रूंधे हुए गले से सिर झुकाएं पीडि़त परिवार बस टाइम टू टाइम घटना के बारे में बताए जा रहा था। देखने से ऐसा लगा जैसे कोई फिल्म देखकर आता है तो पूरा सीन नजरों के सामने होता है। हां, बातचीत के दौरान इनमें प्रधान के प्रति गुस्सा भी गजब का था। 

यह दृश्य था घोरावल के उभ्भा गांव का। इसी गांव में 17 जुलाई को प्रधान पक्ष द्वारा भूमि पर कब्जा करने को लेकर नरसंहार हुआ था। उसमें दस लोगों की मौत हो गई थी और 28 लोग घायल हो गए थे। घटना के दस दिन बाद शुक्रवार को वैसे तो स्थिति सामान्य हो चली थी लेकिन जब भी कोई ग्रामीणों से उस घटना के बारे में जिक्र करता तब वह घटना को लेकर गम के साथ गुस्से में दिखने लगती हैं। अपनों को खोने के गम में पूरे गांव की एक ही स्थिति है। इसमें भी जब ग्रामीण ग्राम प्रधान का नाम सुनते हैं तो गुस्से तमतमा जाते हैं। गांव में पहुंचने वाली हर टीम से ग्रामीण बस एक ही बात कहते हैं कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और हमें सुरक्षा मिले। 

सत्यापन पूरा करने के लिए गांव में हैं टीम

उभ्भा गांव में प्रत्येक परिवार को आवास, शौचालय व अन्य सुविधाएं देने के लिए मुख्यमंत्री को निर्देश दिया है। उसी के क्रम में जिले के सभी जनपदस्तरीय अधिकारी अपने-अपने विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए लगे हुए हैं। गांव में एक टीम आवास का सत्यापन के लिए शनिवार को पहुंची। टीम ने प्रत्येक परिवार के फार्म के हिसाब से उनके घर के सदस्यों का सत्यापन किया। 

परिजनों ने किया श्राद्ध

उभ्भा गांव में 17 जुलाई को हुए नरसंहार में मारे गए ग्रामीणों के परिजन शनिवार को श्राद्ध किया। महिलाएं तालाब-पोखरों में स्नान की। पुरुषों ने श्राद्ध किया। श्राद्ध की वजह से गांव में पूरे दिन ग्रामीण व्यस्त रहे। श्राद्ध की वजह से गांव में पहुंची विभिन्न टीम को कुछ देर तक इंतजार करना पड़ा। उधर, श्राद्ध के दौरान किसी तरह का व्यवधान न आने पाए इसके लिए पुलिस भी तैनात रही। 

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Posted By: Abhishek Sharma

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