मीरजापुर, जेएनएन। एक बेटी जो अभी ठीक से बड़ी भी नहीं हो पाई है आैर दुनिया के रीति-रिवाजों से पूरी तरह वाकिफ भी नहीं हो पाई। लेकिन वक्त की ऐसी मार पड़ी उसे बड़ों जैसी गंभीरता दिखानी पड़ी आैर बेटा बनकर हर वह फर्ज अदा करना पड़ा जो परंपराओं में सिर्फ बेटे ही कर पाते हैं। कैंसर की बीमारी से जूझ रही मां की मौत के बाद उन्हें मुखाग्नि देकर बेटी उजाला ने अपनी जीजिविषा का ऐसा नमूना पेश किया, जिसे जानकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। 

पड़री थानाक्षेत्र के बेलवन ग्राम सभा के पकरी पूरा गांव निवासी स्व. रमेश पांडेय पुत्र स्व गौरीशंकर पांडेय की पत्नी सरोजा देवी पांडेय की कैंसर जैसी लंबी बिमारी से जूझते-जूझते गुरुवार भोर में मौत हो गई। मृतक सरोजा के पति आैर इकलौते पुत्र की पहले ही माैत हो चुकी है। परिवार में सिर्फ कक्षा 12 में पढ़ने वाली बेटी उजाला ही है। मां की मौत से उस पर गमों का पहाड़ टूटा लेकिन आंसुओं को पीकर बेटी उजाला ने मां को मुखाग्नि दी। यह क्षेत्र की ऐसी पहली घटना है जब बेटी ने मां को मुखाग्नि दी हो। चंडिका घाट पर बेटी द्वारा मां को मुखाग्नि देते हुए जिस किसी ने देखा उसने विधाता के इस विधान की चर्चा जरुर की। उजाला अभी 12वीं की छात्रा है आैर करीब 15 वर्ष पहले उसने अपने पिता को खो दिया। इकलौता भाई राहुल भी कुछ वर्ष पूर्व ही सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। घर में सिर्फ मां थी जो कैंसर की बीमारी से जूझ रहीं थी लेकिन वहीं इस बेटी की आखिरी सरपरस्त थीं। अब मां का साया भी बेटी के सिर से जुदा हो गया जिससे उजाला की आंखें आंसुओं की झील बन गई हैं आैर वह अपलक शून्य को निहारते हुए आने वाली चुनाैतियों से लड़ने का जज्बा बटोर रही है। 

क्षेत्र में रही चर्चा : बेटी उजाला द्वारा मां को मुखाग्नि देने की चर्चा क्षेत्र में होती रही। स्थानीय लोगों ने बताया कि ऐसा इस क्षेत्र में पहली बार हुआ है लेकिन सबने बेटी की हिम्मत की दाद दी आैर कहा कि ऐसी बेटियां होती हैं, जो लाख तकलीफों के बावजूद हर फर्ज को निभाती हैं। लोगों ने यह भी कहा कि पढ़ाई-लिखाई की उम्र में इस बेटी के सामने जिंदगी का संघर्ष खड़ा हो गया है।

Posted By: Abhishek Sharma