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जौ के आटे, तिल, शहद, गंगाजल से बने पिंड का क्या है महत्व, ऐसे मिलेगा पूर्वजों का आशीर्वाद

By Pradyuman Pandey RamuEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 27 Sep 2026 12:06 PM (IST)

पितृपक्ष में काशी में पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है, जहां जौ के आटे, तिल, शहद, कुशा और गंगाजल ...और पढ़ें

HighLights

  1. पितृपक्ष मोक्ष और आशीर्वाद का पर्व, 15 दिनों तक चलता है।

  2. काशी में पिंडदान पितरों को सीधे मोक्ष दिलाता है।

  3. जौ, तिल, शहद, कुशा, गंगाजल से बने पिंड का विशेष महत्व।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। सनातन धर्म में पितृपक्ष को मोक्ष और आशीर्वाद का पर्व माना जाता है। इस अवसर पर 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। काशी से गया तक इस दौरान पिंडदान की परंपरा निभाई जाती है। काशी के शीतला घाट के पुजारी दिनेश महाराज बताते हैं कि सभी लोग अपने पितरों का जल यहीं गंगा किनारे से शुरू करके गया में जाकर पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि काशी में किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है।

दिनेश महाराज का कहना है, "हमारे लिए पितृ ही सबसे बड़े भगवान हैं। चाहे दादा-परदादा हों, जिनके पिता नहीं हैं, वे अपने पितरों को ही देवता मानकर कार्य करते हैं। पितृपक्ष में किया गया दान-पुण्य पितरों को मुक्ति देता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।"

पिंड का महत्व और उसकी रचना के बारे में बताते हुए महाराज कहते हैं कि पिंड को हमारे शरीर का प्रतीक माना जाता है, जो पांच चीजों से बनाया जाता है। हर एक का अपना वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व है:

1. जौ का आटा - जौ को सतयुग का पहला अनाज माना जाता है, यह पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। इससे बना पिंड पितरों को तृप्त करता है।

2. काले तिल - काले तिल को भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माना गया है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और पितरों को शांति प्रदान करता है।

3. शहद- शहद में मधुरता और अमरत्व का वास है। यह पितरों की आत्मा को मधुर तृप्ति देता है।

4. कुशा - कुशा के बिना कोई भी पितृ कार्य पूरा नहीं होता। यह पवित्र घास पितरों तक हमारे द्वारा दिए गए अन्न-जल को पहुंचाने का माध्यम होती है।

5. गंगाजल - गंगाजल मोक्षदायिनी है। काशी की गंगा के जल से बना पिंड पितरों को सीधे मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है।

पितृपक्ष के दौरान काशी के गंगा घाटों पर सुबह से ही पिंडदान और तर्पण के लिए भीड़ उमड़ती है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा से इन पांच सामग्रियों से पितरों का पिंडदान करता है, उसे पितृदोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।