वाराणसी : पूर्वाचल में मानसून एक बार फिर तय समय से लगभग सप्ताह भर पिछड़ गया है। जिसकी वजह से वातावरण में सूरज की तल्खी पुन: असर करने से उमस और तपिश का स्तर बढ़ गया है। शनिवार को भी मौसम का रुख तल्खी की ओर रहा। सुबह से ही हवाओं का जोर तो रहा मगर हवाओं ने गर्मी का चोला ओढ़ कर लू सरीखा अहसास भी कराया। इस दौरान दिन में पारा भी चालीस डिग्री से अधिक समूचे पूर्वाचल में दर्ज किया गया।

सुबह से हालांकि समूचे पूर्वाचल में प्री मानसूनी बादलों का आसमान में कब्जा रहा। जिससे सूरज की तीखी किरणें सीधे असर नहीं कर सकीं मगर धूप का दोपहर तक असर हुआ तो चलने वाली हवा भी गर्मी का अहसास दिन भर कराती रही।

अवकाश का दिन होने से सड़कों पर भीड़ तो कम दिखी मगर दोपहर में अमूमन सड़कों पर सन्नाटा ही नजर आया। हालांकि इस दौरान सोनभद्र और मीरजापुर आदि जिलों में कुछ जगहों पर प्री मानसूनी बादलों ने दस्तक तो दी मगर तेज हवाओं के रुख से बारिश की स्थितियां नहीं बन सकीं। मानसून फंसा छत्तीसगढ़ में

तेजी से उत्तर की ओर रुख करता मानसून तीन दिनों से छत्तीसगढ़ में ठहरा हुआ है। मानसून के ठिठकने से अब पूर्वाचल में मानसूनी बादलों की आमद सप्ताह भर की देरी से होने का अंदेशा मौसम विज्ञानी जता रहे हैं। हालांकि प्री मानसूनी परिस्थितियां पूर्ववत बनी हुई हैं। जिससे वातावरण में नमी का स्तर बढ़ने पर बादल पानी भी गिरा रहे हैं। उत्तर फिर से सूखे की जद में!

बीते वर्ष भी मानसूनी बादलों ने औसत से कम बारिश कराई थी। इस बार भी मानसून की सक्रियता लगभग सप्ताह भर पिछड़ने का अंदेशा है। अगर समय रहते मानसूनी बादलों ने गति नहीं पकड़ी तो उत्तर भारत में एक बार फिर से सूखे की स्थितियां बन सकती हैं।

Posted By: Jagran