वाराणसी, जेएनएन। सदर तहसील में नितेश सिंह बब्लू की हुई हत्या में वांछित गिरधारी विश्वकर्मा को तिहाड़ जेल से लाने के लिए अदालत ने वारंट बी जारी किया है। शिवपुर थाना प्रभारी राजीव रंजन उपाध्याय ने बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एसपी यादव की अदालत में इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया कि चोलापुर थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव निवासी गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डाक्टर उर्फ कन्हैया वर्ष 2019 में हुए नितेश बबलू हत्याकांड मामले में वांछित है। दिल्ली पुलिस ने गत 12 जनवरी को उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था जहां से न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। तिहाड़ जेल से लाने के लिए उसके विरुद्ध वारंट बी जारी करने की अपील की। अदालत ने इस अपील को मंजूर करते हुए गिरधारी विश्वकर्मा के खिलाफ वारंट बी जारी कर दिया। इस बीच वारंट बी तामील कराने के लिए पुलिस की एक टीम दिल्ली रवाना हो गई है। गिरधारी का नाम लखनऊ में कठौता चौराहे के पास पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या में भी सामने आया है।

रेलवे के ठेकों के लिए पूर्व सांसद व विधायक ने मिलाया हाथ

सदर तहसील परिसर में सारनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर व ठेकेदार नीतेश सिंह उर्फ बबलू की हत्या के पीछे की अहम वजह एक पूर्व सांसद व सत्तापक्ष के एक विधायक का हाथ मिलाना बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक रेलवे के ठेकों में वर्चस्व कायम करने के लिए पूर्व सांसद ने विधायक से हाथ मिलाया है। इसी के बाद नितेश को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई थी। इस काम की जिम्मेदारी शार्प शूटर गिरधारी को सौंपी गई थी। जुर्म की दुनिया में पूर्वांचल के कुख्यात नामों की रियल इस्टेट और ठेकेदारी के काम में कड़ी प्रतिद्वंद्विता रही है। इसके साथ ही इन सभी की चाहत यह भी रहती है कि सत्ता के गलियारे तक उनके नाम की धमक भी हो। मुन्ना बजरंगी और व पूर्व सांसद की अदावत के पीछे भी यही एक अहम वजह रही। इस अदावत में मुन्ना बजरंगी गिरोह पर करारा प्रहार तब हुआ जब लखनऊ के विकासनगर में पांच मार्च 2016 को उसके साले पुष्पजीत उर्फ पीजे की हत्या कर दी गई। पीजे की हत्या से बजरंगी उबर भी नहीं पाया था कि एक दिसंबर 2017 को लखनऊ के ग्वारी ओवरब्रिज पर उसके दाएं हाथ कहलाने वाले और वसूली मैनेजर विश्वेश्वरगंज निवासी मोहम्मद तारिक की हत्या कर दी गई। इन सभी वारदातों में एक नाम सामने आया। वह नाम है एक रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक के बेटे का। दिल्ली में गिरधारी की गिरफ्तारी के बाद तमाम वारदातों की परत खुलने लगी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक विगत पांच वर्षों में प्रदेश की राजधानी से यहां तक मारे गए लोगों की हत्या में शामिल शूटर और साजिशकर्ता भी बेनकाब होंगे।

आसान नहीं होगा राज उगलवाना

पुलिस सूत्रों ने बताया कि शातिर बदमाश गिरधारी से कुछ भी बाहर निकलवाना आसान नहीं है। फिर भी प्रयास यही होगा कि गिरधारी चारों हत्या के बारे में सही, सटीक और सार्थक जानकारी दे। ताकि, उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी प्रभावी कार्रवाई हो सके।

एक सफेदपोश के घर रची थी अजीत की हत्या की साजिश

लखनऊ में पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या की साजिश एक सफेदपोश के घर पर रची गई थी। हत्या की वजह पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की हत्या में अजीत की गवाही न होने देने के साथ ही मुहम्मदाबाद गोहना के ब्लाक प्रमुख चुनाव में गिरधारी के आगे कोई सशक्त प्रत्याशी नहीं उतरने देना था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आजमगढ़ जेल में बंद ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू वारदात का सूत्रधार था और उसने गिरधारी को विश्वास में लिया था। फिर इसकी जानकारी जेल में ही बंद अखंड प्रताप सिंह और पूर्व सांसद व सुल्तानपुर निवासी उसके दो गुर्गों को भी दी गई। आजमगढ़ निवासी सफेदपोश ने ही कुंटू के कहने पर गिरधारी के लखनऊ जाने के साथ ही उसके रहने-ठहरने और आवागमन की व्यवस्था भी कराई थी।

अपार्टमेंट में ठहरता था गिरधारी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक शार्प शूटर गिरधारी वारदात करने के अपार्टमेंट में ठहरता था। नितेश की हत्या के तीन दिन पूर्व ही वह बनारस के एक अपार्टमेंट के फ्लैट में ठिकाना बना लिया था। दो दिन उसने नितेश की रेकी की थी और तीसरे दिन वारदात को अंजाम दिया था। दिल्ली में भी उसने अपार्टमेंट को ही ठिकाना बनाया था। वहां से उसे अपनी एक महिला मित्र के पास जाना था, लेकिन उससे पहले ही दिल्ली पुलिस द्वारा दबोच लिया गया।

करीबी हुए भूमिगत

गिरधारी की गिरफ्तारी के बाद उसके करीबी भूमिगत होना शुरू हो गए हैं। पूर्व ब्लाक प्रमुख की हत्या के बाद लखनऊ पुलिस उसके करीबियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। कुछ पुलिस के हाथ भी लगे हैं। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। इनमें गिरधारी को शरण व संरक्षण देने वाले शामिल हैं। आने वाले दिनों में पुलिस पूर्व सांसद पर भी हाथ रख सकती है।

Edited By: Saurabh Chakravarty