वाराणसी, जेएनएन। मोबाइल चोरी होने पर सबसे अधिक डर डाटा खो जाने का होता है। गूगल की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल चोरी मामले में पुलिस महज दो फीसद केस में रिकवरी कर पाती है। ऐसे में एमसीआइआइई (मालवीय सेंटर फार इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप) आइआइटी-बीएचयू के युवा प्रशिक्षु मृत्युंजय सिंह ने इसका हल तलाश लिया है। 'वीजीएम सिक्योरिटी' के नाम से एप डेवलप कर चोरी के हर मुमकिन कोशिश की काट तैयार की है। मोबाइल फोन में एक बार इंस्टाल होने पर यह एप सिर्फ यूजर ही अन-इंस्टाल कर पाएगा। पेश है इस एप की खूबियों पर आधारित मुहम्मद रईस की रिपोर्ट..।

ऐसे किया जा सकेगा इंस्टाल - प्ले स्टोर से अन्य एप की तरह इसे भी मोबाइल में इंस्टाल किया जा सकेगा। इसके बाद एप यूजर से मोबाइल एडमिनिस्ट्रेटर बनने के लिए परमीशन मांगेगा। यूजर की स्वीकृति के बाद उसके ई-मेल पर एक कोड भेजा जाएगा। इसी कोड के माध्यम से ही एप को अन-इंस्टाल किया जा सकता है।

चोर नहीं कर पाएगा स्विच-ऑफ - चोरी करने वाला सबसे पहले मोबाइल को ऑफ करता है। इस एप के इंस्टाल होने के बाद एंड्रायड सेट के पावर बटन काम नहीं करेंगे। बैटरी इनबिल्ट होने से चोरी करने वाला चाहकर भी मोबाइल ऑफ नहीं कर पाएगा। मोबाइल स्विच ऑफ होने से पहले ही यूजर एप के वेबसाइट पर जाकर अपने मोबाइल का रियल टाइम लोकेशन देख सकता है।

डाटा चोरी या गायब होने का नहीं रहेगा डर - वेबसाइट के माध्यम से यूजर अपने मोबाइल की गैलरी से फोटो, वीडियो, डाक्यूमेंट आदि एक्सेस व डाउनलोड भी कर सकता है। इतना ही नहीं, वेबसाइट के माध्यम से ही मोबाइल फोन को ऑन व ऑफ भी किया जा सकता है।

चोर को देख व सुन भी सकेगा यूजर - एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मोबाइल चोरी होने पर वेबसाइट के माध्यम से यूजर अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर चोर की तस्वीर ले सकेगा और वीडियो भी बना सकेगा। वहीं वेबसाइट पर ही ऑडियो सेटिंग का प्रयोग कर आस-पास की आवाज भी सुनी जा सकेगी।

मोबाइल फार्मेट करने पर भी पकड़ा जाएगा चोर - जब तक मोबाइल की बैटरी चार्ज है चोर उसे ऑफ नहीं कर पाएगा। डिस्चार्ज होने पर स्वत: मोबाइल बंद हो जाएगी। इस बीच चोर की लोकेशन नहीं ले पाने पर भी घबराने की जरूरत नहीं। जाहिर है चोर इसे लेकर मोबाइल शॉप पर जाएगा और उसे फार्मेट कराएगा। मगर इनबिल्ट हो चुका यह एप मोबाइल से अनइंस्टाल नहीं होगा। मोबाइल ऑन होते ही रियल टाइम लोकेशन यूजर के ई-मेल पर पहुंच जाएगा। इतना ही नहीं मोबाइल में दूसरा सिम लगाते ही उसका नंबर भी एप के जरिए यूजर तक पहुंच जाएगा।

खुद की मोबाइल चोरी होने पर मिली प्रेरणा :  रायपुर, छत्तीसगढ़ के मूल निवासी मृत्युंजय सिंह ने सात साल पहले एथिकल हैकिंग की पढ़ाई अपने गृह राज्य से ही की थी। इसके बाद बतौर आउटसोर्स पुलिस विभाग के लिए डेढ़ वर्ष तक काम किया। मृत्युंजय बताते हैं कि खुद की मोबाइल चोरी होने पर इस तरह का एप डेवलप करने का विचार आया। इसी विचार के साथ उन्होंने वर्ष 2017 में यूपी स्टार्ट-अप यात्रा में प्रतिभाग किया और सेमीफाइनल में जगह बनाई। दिसंबर में आइआइटी, बीएचयू स्थित एमसीआइआइई में पंजीयन कराया। जनवरी में अकेले ही इस पर काम शुरू किया और आठ महीने की मेहनत के बाद कामयाबी मिली। इसका नाम वेरी गुड मृत्युंजय यानी 'वीजीएम' सिक्योरिटी एप रखा। जल्द ही इसे लांच किया जाएगा। इस एप के माध्यम से दो साल के भीतर ही मोबाइल चोरी की घटना को शून्य किया जा सकता है।