वाराणसी [जय प्रकाश पांडेय] : वरुणा में उफान आने के साथ आखिरकार जिस बात का डर था वही हुआ। जनता से जुडी इस महत्‍वाकांक्षी परियोजना वरुणा कॉरीडोर के बाढ़ में डूबने के साथ ही लाखों रुपये का खेल भी हो गया। सिंचाई और यूपीपीसीएल आदि विभागों की लापरवाही के चलते वरुणा कॉरीडोर फिर एक बार डूब गया। दो साल में किए गए काम दिखाई नहीं पड़ रहे हैं, जबकि सिर्फ चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है।

डूब गया वरुणा कारीडोर

पांच फीट ऊंची रेलिंग में मात्र छह इंच दिखाई पड़ रहा है, इसी रफ्तार से पानी बढ़ता रहा तो वह भी डूब जाएगा। उधर, ठेकेदार के कैंप के साथ उसके सामान भी डूब गए। कर्मचारी सड़क पर खड़े होकर अपने सामानों की निगरानी कर रहे हैं। जेसीबी, टैक्टर समेत अन्य वाहन वरुणापुल के पास खड़े हैं। वरुणा का पानी आसपास के घरों तक पहुंच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 201 करोड़ रुपये स्वीकृत करते हुए वरुणा कॉरीडोर का काम शीघ्र काम पूरा कराने का निर्देश दिया था। उन्होंने खुद निरीक्षण करने के साथ कई अधिकारियों को मौके पर भेजा लेकिन काम में तेजी नहीं आई। पिछले साल बारिश होने के साथ काफी मिट्टी वरुणा में बह गई थी, इसको लेकर काफी बवाल हुआ था। मिट्टी घपले को लेकर शासन बीएचयू आइआइटी और जिला प्रशासन के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें बनाकर जांच भी कराई गई लेकिन जांच में क्या हुआ आज तक किसी को मालूम नहीं चला। सरकार बदलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई विभाग को बारिश से पहले वरुणा कॉरीडोर का काम पूरा करने का निर्देश दिया था।

पूर्व में भी हो चुकी है कार्रवाई

प्रमुख सचिव और जिले के नोडल अफसर रजनीश दुबे ने भी बारिश से पहले काम खत्म करने को कहा था फिर भी काम पूरा नहीं हो सका। काम में तेजी नहीं लाने और लापरवाही बरतने पर सिंचाई मंत्री ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता, अधीक्षण और अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया था। कार्यदायी संस्था छावनी से पुरानापुल तक तटबंध बनाने के साथ रेलिंग लगाने का काम पूरा कर सकी थी। पुरानापुल के आगे सिर्फ तटबंध का काम हो सका था, यहां रेलिंग बनाने की तैयारी चल रही थी। 

Posted By: Abhishek Sharma