वाराणसी [विनोद पांडेय]। धर्म और संस्कृति के लिए विख्यात बनारस अब देश-दुनिया को कचरे से कोयला बनाने का मंत्र भी देगा। कचरे से कोयला बनाने का पहला प्लांट बनारस के रमना में बनने जा रहा है। इसकी तैयारी राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) ने कर ली है। निविदा प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है और दीपावली से पहले प्लांट का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। इन दिनों बिजली उत्‍पादन इकाइयों में कोयला संकट को देखते हुए यह प्रयोग देश में नई ऊर्जा क्रांति ला सकता है।  

दादरी में किया गया प्रयोग : दावा तो यह है कि कचरे से कोयला बनाने का काम दुनिया में अभी तक कहीं नहीं हुआ है। इसके लिए दादरी में एनटीपीसी ने सफलता पूर्वक प्रयोग कर लिया है और अब इसे धरातल पर उतारने की तैयारी हो रही है। प्लांट निर्माण के लिए नगर निगम ने रमना में 25 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है। 20 एकड़ में प्लांट का निर्माण होगा और पांच एकड़ में कोयला निर्माण के दौरान निकले अवशेष को निस्तारित करने के लिए वैज्ञानिक विधि से व्यवस्था की जाएगी। बनारस में प्लांट की उपयोगिता सिद्ध हुई तो इंदौर व भोपाल में भी प्लांट निर्माण किया जाएगा।

600 टन कचरे से 200 टन कोयला : दादरी में हुए अध्ययन के अनुसार 600 टन कचरे से 200 टन कोयला बनाया जाएगा। प्लांट का निर्माण अगले 25 वर्षों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन शहर से 600 टन कचरा निकलता है। शहर विस्तार के बाद करीब 800 टन कचरा निकासी का अनुमान है। इसलिए प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 800 टन से अधिक कचरा प्रसंस्करण की होगी।

150 करोड़ प्लांट निर्माण का खर्च : प्लांट की लागत 150 करोड़ रुपये आएगी। दो साल तक इसका संचालन निर्माण करने वाली कंपनी के पास होगा। इसके बाद प्लांट चलाने की जिम्मेदारी वाराणसी नगर निगम को सौंप दी जाएगी। ईपीसी (एनर्जी प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन) पैकेज के लिए दो चरण में बोली के आधार पर आनलाइन निविदा आमंत्रित की गई है। टेक्निकल बिड की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कांट्रेक्ट अवार्ड जारी होने की तिथि से 12 माह के अंदर प्लांट निर्माण कर लिया जाएगा।

ईको फ्रेंडली होगा प्लांट : योजना को अलग-अलग उप-विधाओं के संयोजन, परीक्षण, रखरखाव और प्रतिस्थापन के लिए माड्यूलर फैशन में डिजाइन किया जाएगा। यह प्लांट गंधहीन होगा। उत्सर्जन और शोर सीमा मानदंडों के अनुरूप होगी। संयंत्र एक सुंदर वातावरण से घिरा होगा। साथ ही , हानिकारक पदार्थों के निर्वहन को रोकने के लिए कचरा लीचेट उपचार प्रणाली (जमीन में गड्ढा खोदकर निस्तारण करने की विधि) से गुजरेगा। इसके अलावा , मानव जोखिम सीमित रहेगा, क्योंकि इसके संचालन और रखरखाव में स्थापित मशीनें स्वचालित होंगी। एनटीपीसी ने दादरी चरण- 1 में एक डेमो व पायलट टारफेक्शन प्लांट स्थापित किया है।

नहीं चले बिजली बनाने के तीन प्लांट: नगर के विभिन्न इलाकों में 10 छोटे प्लांटों को स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार हुआ था। सीएसआर फंड से इनकी स्थापना होनी थी, जो रसोई के कचरे से बिजली बनाने का प्लांट था, लेकिन प्रस्तावित 10 प्लांट के सापेक्ष अब तक तीन प्लांट ही स्थापित हुए हैं। इनमें एक पहाडिय़ा मंडी, दूसरा भवनिया पोखरी और तीसरा प्लांट आइडीएच कालोनी में है। हालांकि अभी तीनों प्लांटों का संचालन नहीं हो रहा है।

एक किलो कोयला, छह रुपये खर्च : अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ है कि एक किलो कोयला बनाने में छह रुपये खर्च आएगा। दिल्ली के गाजीपुर में बने कचरे से बिजली बनाने के प्लांट में प्रति यूनिट 11 से 12 रुपये खर्च आता है। मार्केट में प्रति यूनिट बिजली की बिक्री अधिकतम आठ रुपये में होती है। जाहिर है कचरे से बिजली बनाने का प्लांट घाटे का सौदा है। इसे देखते हुए दादारी में एनटीपीसी ने कचरे से कोयला बनाने का फैसला किया है।

बोले अधिकारी : प्‍लांट के निर्माण के लिए रमना में 25 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इस नए प्लांट में कचरा से बिजली के बजाय कोयला बनाया जाएगा। यह कार्य एनटीपीसी करेगा। यह देश का पहला प्लांट होगा जहां कचरे से कोयला बनाया जाएगा। -अजय कुमार , अधिशासी अभियंता, नगर निगम वाराणसी। 

Edited By: Abhishek Sharma