वाराणसी : बालिकाओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर जुलाई माह में एक से 31 जुलाई तक 'बालिका सुरक्षा अभियान' चलाया गया था। प्रदेश सरकार ने इसमें सूची जारी की है, जिसमें इस अभियान से स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदेश में वाराणसी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। पूर्वाचल के विभिन्न जिलों ने भी बेहतर किया है। जौनपुर को छठा व गाजीपुर को 11वां स्थान मिला। जबकि मऊ 16वें और मीरजापुर 25वें स्थान पर रहा

यह भी जानें

- वाराणसी के आठ ब्लॉक में अभियान।

-अंग्रेजी-हिंदी माध्यम के 1149 स्कूल।

- 6-12 वर्ष के 180395 बालक-बालिका।

- 13 वर्ष से ऊपर के 329231 बालक व बालिकाएं।

- कुल 509626 विद्यार्थियों को किया गया जागरूक।

हुआ लाइव डेमो : विद्यार्थियों को सही स्पर्श और गलत स्पर्श पहचानें, कुछ गलत होने पर चुप्पी तोड़ने, बाल हिंसा की दी गई जानकारी। सरकार के हेल्पलाइन नंबर चाइल्ड 1098, डायल 100, 181 महिला हेल्पलाइन और 1090 वीमेन पावर हेल्पलाइन देने के साथ इनका लाइव डेमो करके भी दिखाया गया। हर थाना स्तर पर दो-दो टीमें बनीं। स्कूलों में टीम का गठन हुआ। महिला कल्याण विभाग, पुलिस और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ शामिल हुए।

नातिन का यौन शोषण करने पर हुई थी एफआइआर : एक अगस्त से 15 अगस्त तक टीचरों को ट्रेनिंग दी गई। विद्यालय में नियमित प्रार्थना के बाद बच्चों से गुड टच, बैड टच पर चर्चा करने का निर्देश दिया गया। हर स्कूल में सुरक्षा समिति बनी। शिकायत पेटिका लगवाई गई, जिसमें बच्चे अपनी समस्या लिखकर डालते हैं। इसे एंटी रोमियो दल खोलता है। अभियान के दौरान कई शिकायत मिली जिसे सुलझाया गया। एक मामले में रोहनिया थाने में केस भी दर्ज हुआ, जिसमें नाना अपनी नातिन का सेक्सुअल एब्यूज कर रहा था। जानकारी स्कूल की टीचरों के जरिए मिली थी। इसमें एफआइआर भी हुई थी।

दो ट्रेनरों ने किया प्रशिक्षित : राज्य स्तर पर वाराणसी में दो ट्रेनर बाल संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह, मंडलीय बाल संरक्षण सलाहकार यूनीसेफ प्रीतेश तिवारी थे। इन्होंने पुलिस, एनजीओ एवं टीचरों को ट्रेंड किया। महिला पुलिस ने छात्राओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी थी। अभियान की हर दिन मॉनीटरिंग की गई।

यह एनजीओ थे शामिल : मानवाधिकार जन निगरानी समिति, सार्क संस्था, डा. शंभूनाथ रिसर्च फाउंडेशन, प्रगति पथ फाउंडेशन, महिला स्वरोजगार, मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्था, मानव विकास सेवा संस्थान, लोक चेतना, आंगन ट्रस्ट, एसओएस बाल ग्राम।

ये सरकारी विभाग थे शामिल  : जिला प्रोबेशन विभाग के तहत महिला कल्याण विभाग, चाइल्डलाइन, जिला बाल संरक्षण इकाई और महिला शक्ति केंद्र, वन स्टाप सेंटर, बाल कल्याण समिति, पुलिस विभाग में जिले के थाने व अधिकारीगण। - वाट्सएप ग्रुप से हुई निगरानी -अभियान से जुड़े लोगों का वाट्सएप ग्रुप बना जिसमें हर दिन के कार्यक्रम को अपडेट किया जाता। हर थाने से नोडल व्यक्ति नामित थे जो अपने क्षेत्र के स्कूलों में बालिका सुरक्षा कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रतिदिन सबमिट करते थे।

बोले अधिकारी: बालिका सुरक्षा अभियान के दौरान स्कूली छात्राओं ने अपने साथ हो रही छेड़खानी, यौन शोषण तक की बात बताई जिसका समाधान किया गया। - निरुपमा सिंह, बाल संरक्षण अधिकारी, वाराणसी।

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