वाराणसी, जेएनएन। नगर निगम में 25 नालों की सफाई के नाम पर पिछले पांच साल से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा था। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज 176 नालों में मौके से 25 गुम हो गए हैैं। अब यह आंकड़ा 151 पर आ गया है। स्वास्थ्य और सामान्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अब तक एक नालों को पांच-पांच भाग में बांटकर सफाई की जाती थी, जिसमें भ्रष्टाचार का लंबा खेल खेला जाता था। 

जब अपर नगर आयुक्त देवी दयाल वर्मा ने नालों की सफाई से पहले दोनों विभागों का सर्वे कराया तो सच सामने आया। खास बात यह है कि दोनों विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों ने ही एक-दूसरे की पोल खोली है। पिछले पांच वर्षों से दोनों विभागों के अधिकारी नालों की सफाई में मलाई काटते थे। स्वास्थ्य विभाग पहले 106 छोटे नाले और सामान्य विभाग (इंजीनियङ्क्षरग विभाग) 70 बड़े नालों की नालों की सफाई कराता था लेकिन अब इनकी संख्या 151 रह गई है। इसमें 115 छोटे व 36 बड़े नाले हैं। 

अपर नगर आयुक्त देवी दयाल वर्मा ने नालों की सफाई से पूर्व दोनों विभागों की संयुक्त रूप से सर्वे के लिए कहा था। उन्होंने बताया कि सफाई के बाद 24 घंटे में नालों के सिल्ट का निस्तारण जरूरी है। इसमें लापरवाही पर संबंधित कर्मचारी व ठीकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बड़े नालों की सफाई ठीकेदारों के माध्यम से कराई जाती है। इसके लिए गुरुवार को नगर निगम में निविदाएं निकाली जानी हैं। वहीं निगम ने 113 छोटे नालों की सफाई शुरू करा दी है। आम तौर पर  15 मार्च के बाद नालों की सफाई शुरू होती थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते इस बार नालों की सफाई पिछड़ गई है।

ऐसे कम हुए नाले 

नगर निगम असि नदी को नाला मानते हुए सफाई कराता है। सुंदरपुर से अस्सी तक इसके चार भाग नगर निगम के रिकार्ड में हैं। इसी तरह महमूरगंज से आंध्रा पुल तक के नाले की पांच भाग में सफाई कराई जाती है। वरुणापार जोन के पलौधी नाले की भी सफाई कई भाग में कराई जाती है।

Posted By: Abhishek Sharma

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