वाराणसी, जेएनएन। नगर निगम को किरायेदारी भवनों से अनुमानित 20 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसको लेकर बीते दिनों कैग की आडिट में आपत्ति दर्ज कराई गई है। जिसके बाद नगर आयुक्त गौरांग राठी ने आदेशित किया है कि ऐसे भवन जिनमें किरायेदार रहते हैं उनकी सूची बनाई जाए। ऐसे भवनों से नगर निगम अधिनियम के तहत गृहकर की वसूली की जाए।

इसके बाद कर विभाग ने सर्वे का मन बनाया है। नोएडा व लखनऊ नगर निगम की तर्ज पर किरायेदारी भवनों की सूची तैयार करने के लिए तैयारी कर रहा है। नगर निगम अधिनियम के तहत किरायेदारी भवनों का गृहकर का निर्धारण निर्माण के वर्ष से आकलन कर किया जाता है। जिस भवन में भवन स्वामी स्वयं रहता है उस भवन का वार्षिक मूल्यांकन को भी आधार बनाया जाता है। मसलन, यदि भवन 10 से कम पुराना है तो जिस भवन में भवन स्वामी रहते हैं उसके वार्षिक मूल्यांकन के सापेक्ष 25 फीसद अधिक गृहकर होगा। यदि 10 से अधिक व 20 से कम हो, उसका गृहकर 12.5 फीसद अधिक गृहकर होगा। यदि भवन 20 वर्ष से अधिक पुराना है तो वार्षिक मूल्यांकन के बराबर गृहकर निर्धारण होगा।

जिस भवन में भवन स्वामी रहते हैं उसमें मिलती है छूट

नगर निगम अधिनियम के तहत जिस भवन में भवन स्वामी स्वयं रहते हैं उसमें वर्ष के आधार पर छूट मिलता है। मसलन, यदि भवन 10 वर्ष से कम पुराना है तो 25 फीसद छूट दी जाती है। यदि भवन 10 वर्ष से अधिक व 20 वर्ष से कम पुराना होता है तो उसके गृहकर में 32.5 फीसद की छूट दी जाती है। ऐसे ही यदि भवन 20 वर्ष से अधिक पुराना है तो 40 फीसद गृहकर में छूट दी जाती है।

एक लाख भवनों में किरायेदार

नगर निगम सीमा में दो लाख 55 हजार भवनों की संख्या है। वहीं, 23 हजार प्लाट हैं जिनसे गृहकर वसूला जाता है। एक अनुमान के मुताबिक एक लाख भवनों में किरायेदार रहते हैं। कुछ ऐसे भवन हैं जिसमें भवन स्वामी भी किरायेदारों के साथ रहते हैं। वहीं, कई ऐसे भवन हैं जिसमें ऊपर से नीचे तक के तल में किरायेदार ही रहते हैं।

किरायेदारी भवनों को लेकर सूची बनाने की तैयारी हो रही है

किरायेदारी भवनों को लेकर सूची बनाने की तैयारी हो रही है ताकि गृहकर के मद में हो रहे नुकसान को रोका जा सके। कैग की आडिट में इसको लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है जिसके बाद किरायेदारी भवनों के लिए कवायद शुरू हो रही है।

- पीके द्विवेदी, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी नगर निगम

 

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