वाराणसी, जेएनएन। हिंदी के 12 मासों में स्नान दान के निमित्त प्रमुख वैशाख माह की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने पुण्‍य की कामना से स्नान दान किया। बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ के साथ ही श्रीहरि का दर्शन पूजन किया। इसके लिए सुबह से ही आस्‍थावानों का रेला गंगा की ओर उमड़ा और पुण्‍य की डुबकी लगाने के बाद दान पुण्‍य की बेला में दायित्‍वों का निर्वाह किया। इसके साथ चैत्र पूर्णिमा से शुरू एक मासीय स्नान-दान, यम-नियम का समापन हो गया।

ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार वैशाख मास में इस समय में प्रात: गंगा स्नान की विशेष महत्ता होती है। मान्यता है कि एक मास तक चलने वाले स्नान-दान, यम-नियम का पालन कर भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में समस्त पापों से निवृत्ति के साथ सभी मनोकामना पूरी होती है। अंत में वैकुंठ धाम में जगह मिलती है।

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Posted By: Abhishek Sharma