विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उत्तर प्रदेश में निजी कारों को फिटनेस प्रमाणपत्र से मिली बड़ी राहत, लाखों वाहन मालिकों को फायदा

Published: Fri, 18 Sep 2026 06:46 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में अब चालक को छोड़कर छह से नौ सीट तक की क्षमता वाले निजी वाहनों को वार्षिक फिटनेस प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी।

News Article Hero Image

जागरण संवाददाता, वाराणसी। अब प्रदेश में ड्राइवर को छोड़कर छह से अधिक, नौ सीट तक की क्षमता वाले निजी वाहन को प्रतिवर्ष “फिटनेस प्रमाणपत्र” नहीं देना होगा। इस आशय का आदेश जारी हो गया और फिटनेस प्रमाण देने को लेकर परिवहन आयुक्त के 12 दिसंबर 2005 के पूर्व के आदेश रद कर दिया गया है। इससे प्रदेश के लाखों वाहन स्वामियों को फायदा होगा।

पूर्व मंत्री ने उठाया था मामला

पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि मेरी निजी उपयोग वाली इनोवा यूपी 65 सीके 0999 के फिटनेस के लिए आरटीओ वाराणसी ने नोटिस देते हुए उसको जब्त करने की धमकी दी थी। नियमों की जानकारी होने के नाते मैंने इसका प्रतिवाद करते हुए नोटिस वापस लेने के लिए पत्र लिखा। नोटिस तो वापस ले लिया गया, मगर हजारों मोटर मालिकों से फिटनेस की मांग की जा रही थी।

मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि कई राज्यों में निजी वाहन स्वामियों से फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मांगा जाता था। मैंने सात जुलाई 2020 को इसे प्रमुख सचिव परिवहन तथा केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को इस संबंध में पत्र लिखकर मामला उठाया।

विधान परिषद की कमेटी के सामने भी इस मुद्दे को रखा। करीब छह साल बाद उत्तर प्रदेश शासन के निदेश पर परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने 15 सितंबर 2026 को परिपत्र संख्या-1877 सा०प्र०/202667टीआर/2020 जारी करते हुए स्पष्ट किया कि केवल सीट क्षमता के आधार पर किसी भी प्राइवेट मोटर कार से फिटनेस प्रमाणपत्र लेने के लिए बाध्य करना कानूनन सही नहीं माना जाएगा।

सभी आरटीओ को निर्देशित किया जाता है कि पूर्व के आदेश जो 12 दिसंबर 2025 को जारी किए गए थे उसको निरस्त करने के बाद अब सीट क्षमता के आधार पर निजी गैर परिवहन यानों के लिए फिटनेस प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की अनिवार्यता आरोपित न किया जाए।