वाराणसी, जागरण संवाददाता। सीतापुर जाने के इंतजार में 303 रायफलों का जखीरा वाराणसी में मौजूद है। चलन से बाहर होने के बाद पुलिस लाइन में रखी रायफलों का फ‍िलहाल कोई उपयोग नहीं है। केंद्रीय आयुध भंडार में भेजने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है। वाराणसी में अंग्रेजोंं के जमाने वाली 303 रायफलों को केंद्रीय आयुध भंडार सीतापुर भेजने की तैयारी है।

चलन से बाहर हुई .303 रायफलें यूपी पुलिस के केंद्रीय आयुध भंडार सीतापुर जाने का इंतजार कर रही हैं। इसके लिए पत्र भी लिखा गया है। उपयोग में नहीं आ रही रायफलों को रखने के लिए वहां अभी कोई जगह निर्धारित नहीं है। इसके चलते पुलिस लाइन के मैग्जीन (असलहा-कारतूस रखने का स्थान) में रखा गया है। आर्मोरर इनकी देख-रेख कर रहे हैं।

75 वर्ष तक यूपी पुलिस का साथ देने वाली .303 रायफलों को दो साल पहले चलन से बाहर कर दिया गया था। बनारस पुलिस लाइन में 26 जनवरी 2020 को बकायदा इसे विदाई दी गई। इसके बदले जवानों को असाल्ट रायफलें दे दी गईं। पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक उमेश कुमार दुबे के अनुसार लगभग 1500 .303 रायफलों को पुलिस लाइन के आयुध भंडार (मैग्जीन) में रख दिया गया। अब इनमें से कुछ कभी-कभी निकलती हैं। चुनाव में या जब कभी अतिरिक्त असलहे की आवश्यकता होती है। इन्हें होमगार्ड या पीआरडी जवानों को दिया जाता है।

हो सकता है इस्तेमाल

चलन से बाहर हुईं रायफलें सीतापुरा केंद्रीय आयुध भंडार में रखी जाएंगी। इनका इस्तेमाल क्या होगा यह अभी तय नहीं है। उमेश कुमार की मानें तो रायफलें अभी भी काफी अच्छी हालत में हैं। उनका इस्तेमाल ग्रेनेड लांचर तैयार करने में किया जा सकता है। इससे पुलिस की क्षमता में वृद्धि हो जाएगी। इसके अलावा कुछ छोटी बंदूक भी बनाने में इसका इस्तेमाल हो सकता है।

75 साल तक दिया साथ : .303 रायफल ब्रिटिश आर्मी का सबसे भरोसेमंद हथियार रहा है। इसका इस्तेमाल सबसे पहले 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान किया गया था। 1945 में यूपी पुलिस को यह रायफल मिली थी। इस रायफल को 1955 में अप्रचलित घोषित कर दिया गया था इसके बाद भी यूपी पुलिस इसका इस्तेमाल करती रही। अपराधियों का सामना डटकर किया। माना जाता था कि जिस सिपाही के हाथ में यह रायफल होती थी उसे मौत से डर नहीं लगता था।

Edited By: Abhishek Sharma