वाराणसी, जेएनएन। बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक को यूनेस्को की धरोहर सूची में स्थान दिलाया जाएगा। इसके लिए भारत में श्रीलंका के राजदूत ऑस्टिन फर्नांडो ने भरोसा दिया है। महाबोधि सोसाइटी आफ इंडिया की ओर से सारनाथ में आयोजित त्रिपिटक सप्ताह समारोह में उन्होंने कहा कि इसके लिए वे श्रीलंका के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्ताव रखेंगे। ऋग्वेद पहले से ही यूनेस्को की सूची में शामिल है, त्रिपिटक के लिए भी उसी तरह प्रयास किए जाएंगे। फर्नांडो ने कहा कि त्रिपिटक में भगवान बुद्ध के मूल वचन संग्रहित हैं। इसके जन- जन तक पहुंचने से विश्व में आतंकवाद, जैसी समस्या खत्म हो सकती है। बुद्ध के वचनों को आत्मसात करने से विश्व में शांति और अमन-चैन स्थापित हो सकता है। बुद्ध के वचन किसी देश, धर्म, जाति में बंधे नहीं हैं, बल्कि पूरे विश्व समुदाय के विकास में सहायक हैं। इससे पहले उन्होंने श्रीलंका, थाई, लाओस, कम्बोडिया, म्यांमार, बांगलादेश समेत अन्य देशों के 100 बौद्ध भिक्षुओं को अन्न व चीवर दान किया। सोसाइटी के  संयुक्त सचिव भिक्षु के मेधानकर थेरो ने कहा त्रिपिटक सप्ताह का मुख्य उद्देश्य बुद्ध वचनों का विश्व में प्रसार है। भिक्षु के सिरी सुमेध थेरो, भिक्षु  चंदिमा, भिक्षु धम्म रत्न, भिक्षु हेमरत्न, सहित बौद्ध भिक्षु व श्रीलंका से आए दर्जनों बौद्ध अनुयायी शामिल थे।

Posted By: Abhishek Sharma

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