जौनपुर, जेएनएन। रेलवे में नौकरी दिलाने के बहाने बेरोजगार युवक ने सगे चाचा और उसके सहयोगियों पर 20 लाख रुपये का चूना लगाने का आरोप लगाया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) के आदेश पर कोतवाली पुलिस  दो चाचा, उसके बेटे व अन्य अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना में जुट गई है।  

शहर के ख्वाजादोस्त मोहल्ला निवासी सुमित श्रीवास्तव पुत्र प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने दीवानी न्यायालय में दफा 156 (3) के तहत प्रार्थनापत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। सुमित के अनुसार सरकारी नौकरी के लिए प्रयासरत उसके भाई अमित को प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही थी। 19 नवंबर 2017 को सरकारी सेवारत सगे चाचा प्रदीप कुमार श्रीवास्तव निवासी वाजिदपुर अपने पुत्र वैभव संग उसके घर आए। रेलवे में गहरी पैठ का हवाला देते हुए नौकरी दिलाने की बात कही। कहा कि पहले 50-50 हजार रुपये टोकन मनी लगेगा। बाकी 19 लाख रुपये नियुक्ति पत्र मिलने पर देने होंगे। भरोसा कर एक लाख रुपये दे दिए।

18 दिसंबर 2017 को वैभव ने बताया कि साक्षात्कार के लिए डीआरएम कार्यालय नई दिल्ली चलना होगा। 20 दिसंबर को लखनऊ से विमान से दिल्ली ले गए।  प्रदीप और वैभव ने पांच जनवरी 2018 को ज्वाइनिंग लेटर देते हुए शेष 19 लाख रुपये की मांग की। वादी ने इंतजाम कर 10 जनवरी 2018 को वैभव और प्रदीप को घर बुलाकर संजीव व शुभम के समक्ष 19 लाख रुपये दे दिए। 17 जनवरी को अमित को वैभव ट्रेन से दिल्ली ले गया। वहां जाकर कहा कि 15 दिन का प्रशिक्षण रेलवे यार्ड पुरानी दिल्ली में होगा। वहां से अमित को भगा दिया गया। तब वैभव ने कहा कि अब प्रशिक्षण पानीपत कोहांड हाल्ट पर होगा।

कोहांड हाल्ट पहुंचने पर वैभव का भेजा हुआ एक व्यक्ति मिला। उसने कहा कि तुम्हारी ट्रेनिंग स्टेशन मास्टर कराएंगे। चार-पांच दिन बाद स्टेशन मास्टर ने कहा कि रेलवे से प्रशिक्षण संबंधी पत्र अभी तक नहीं आया है। तुम धोखाधडीके शिकार हो गए हो। इसके बाद रुपये लौटाने के लिए बार-बार कहने पर आरोपितों ने पांच लाख रुपये के चेक दिए जो बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने प्रदीप कुमार, उसके बेटे वैभव आदि के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। 

 

Edited By: Abhishek Sharma