वाराणसी, जागरण संवाददाता। मांग की तुलना में अधिक उत्पादन या उदासीन प्रबंधन के चलते हर साल किसानों को अपने कृषि उत्पाद को सड़कों पर फेंकने के लिए बाध्य होना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने का पहला कदम साबित होगा विदेशी बाजार। यह प्रयास सफल हुआ तो निश्चित ही किसानों की आय जहां बढ़ेगी वहीं कृषि उत्पाद की खपत भी हो सकेगी। इसकी शुरुआत प्रायोगिक तौर पर दो साल पहले हो चुकी है। इस साल जनवरी-फरवरी माह में हवाई मार्ग से मटर भी भेजा गया। सात माह बाद अब 12 अक्टूबर को एक बार फिर दो टन सब्जियां भेजने की तैयारी है।

खाड़ी देशों में भेजे जाने वाले सामानों में मुख्य रूप से मिर्च, करेला, लौकी, भिंडी व बैगन समेत सूरन शामिल हैं। इसमें सूरन की मांग इस माह से शुरू हुई है। इसमें भी जी-4 प्रजाति की मिर्च व इसी प्रकार अन्य सब्जियों के आकार-प्रकार संबंधित देश मांग कर रहे हैं। ऐसे में किसानों से मांग के अनुरूप ही सब्जियां ली जा रही हैँ। उपभोक्ता देश जैविक सब्जियाें पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

दरअसल, सरकार लगातार प्रयास में लगी हुई है कि किसानों की आय बढ़े। इस कड़ी में वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली व भदोही समेत अन्य जनपदों के किसानों से कई विभागाें के स्तर पर संपर्क किया जा रहा है। कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के एजीएम डा. सीबी सिंह बताते हैं कि स्थानीय उत्पाद को विदेशी बाजार में पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पहले लखनऊ से उत्पाद को बाहर भेजा जाता था, लेकिन अब वाराणसी से भेजा जाएगा। इसके लिए एयरपोर्ट अथारिटी से बात की गई है। यहां से भेजने में लागत में कमी आएगी जिससे किसानों को लाभ अधिक होगा। 12 अक्टूबर को दो टन का एक कार्गो भेजा जाएगा जिसमें सब्जियां होंगी।

किसानों में जागरुकता का अभाव : एफपीओ नमामि गंगे से जुड़ीं कुसुम बताती हैँ कि सब्जियां उगाती हैं। मीटिंग में एक बार कहा था कि सब्जियां विदेशों में भेजा जाएगा, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। विभाग से काेई संपर्क नहीं है। अगर होता तो निश्चित ही सब्जियों का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जाता। इससे हमारी आय भी बढ़ती।

Edited By: Abhishek Sharma