वाराणसी, इंटरनेट डेस्‍क। बनारस शहर की कई खबरों ने सोमवार को चर्चा बटोरीं जिनमें मेनहोल में गिरा मजदूर, बस परिचालक को जलाया, विश्वनाथ मंदिर का पट बंद, विश्वनाथ धाम में शिव सूक्त, पराग डेयरी की बागडोर आदि प्रमुख खबरें रहीं। जानिए शाम छह बजे तक की शहर-ए-बनारस की पांच प्रमुख और चर्चित खबरें।

वाराणसी में शाही नाला की सफाई के दौरान मेनहोल में गिरा मजदूर, एनडीआरएफ की टीम बचाव में जुटी

वाराणसी के लहुराबीर इलाके के चेतगंज थाना में सोमवार की दोपहर में शाही नाला की सफाई के दौरान मेनहोल में मजदूर गिर गया। जिसे काफी मशक्कत के बाद भी नही निकल सका तो एनडीआरएफ की टीम पिछले दोपहर से ही उसे निकालने में लगी रही। वहीं सभी लोग उसके जीवित होने की भगवान से प्रार्थना करते नजर आए। प्रशासन के अनुसार शहर में शाही नाले की सफाई का काम चल रहा है। जो एक ठेकेदार दर्जनों मजदूरों को लेकर सफाई का काम कर रहा है। सोमवार को लहुराबीर चौराहे के समीप एक मजदूर कमर में रस्सी बांध कर शाही नाले की सफाई के लिए मेनहोल में उतर कर सफाई करते समय उसके कमर की रस्सी कमजोर होने की वजह से टूट गयी जिससे वह चिल्लाने लगा। बाहर खड़े अन्य लोगों ने उसकी आवाज सुनी तो अवाक रह गए। मजदूर मेनहोल में फंसा हुआ था। जबकि उसमें पानी का बहाव काफी होने के साथ ही ऑक्सीजन की कमी के चलते उसकी जान खतरे में आ गई। इसमें ठेकेदार की लापरवाही के चलते ही घटना मानी जा रही है।

वाराणसी में जलाया गया था बस परिचालक को, मर्चरी हाउस पहुंच परिजनों ने की शिनाख्त, होगा डीएनए टेस्ट

कोसड़ा (चक्रपानपुर) गांव के ताल में रविवार को तड़के पुआल के ढेर में जलाएं गए युवक की शिनाख्त बस परिचालक प्रकाशनाथ उर्फ सुग्गन मिश्रा (45) के रूप में हुई। पुआल में जलाने से पहले उसकी गला दबा कर हत्या किए जाने की आशंका जताई गई है। शिवपुर स्थित मर्चरी में रखे शव को सोमवार की दोपहर भाई ओंकारनाथ मिश्रा व रविन्द्र मिश्रा उर्फ गुड्डू ने पहुंच कर देखा। अंडरवियर, पीठ के दाने, मुंह के टूटे दांत व जैकेट से मृतक की पहचान की। बस परिचालक शनिवार को घर से निकला था। मोबाइल स्विच आफ बताने पर स्वजनों को अनहोनी की आशंका हुई। हत्या के मामले में चार लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। घटना के पीछे आशनाई की भी चर्चा है। थानाप्रभारी संजीत बहादुर सिंह ने बताया कि सुराग मिले हैं, जल्द ही मामले का पर्दाफाश हो जाएगा। परिचालक के शव व उनके भाई का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। घटना के बाबत अज्ञात के खिलाफ 302 व 201 का मुकदमा दर्ज किया गया है।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पट 12 घंटे के लिए बंद, 13 दिसंबर को पीएम नरेन्‍द्र मोदी करेंगे कारिडोर का लोकार्पण

बाबा दरबार से गंगधार तक विस्तारित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम कारिडोर का 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकार्पण करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए 10 दिसंबर तक संपूर्ण कार्य पूरा कर लिया जाना है। इस खास मौके पर बाबा दरबार की साज-सज्जा के लिए श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पट सोमवार सुबह छह बजे 12 घंटे के लिए बंद कर दिए गए। शाम छह बजे मंदिर के पट खुलेंगे और रात 11 बजे शयन आरती तक झांकी दर्शन किया जा सकेगा। इसी तरह 30 नवंबर को भी सुबह छह से शाम छह बजे श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए मंदिर में प्रवेश नहीं पाएंगे। वहीं 30 नवंबर की रात शयन आरती के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद होंगे तो दो दिसंबर को सुबह छह बजे ही दर्शन-पूजन का मौका मिल पाएगा। कारण यह कि एक दिसंबर को मंदिर पूरी तरह बंद रहेगा। अगले दिन दो दिसंबर को सुबह छह बजे श्रद्धालुओं के लिए पट खुलेंगे।

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में गूंजेगा शिव सूक्त और चतुर्वेद की ऋचाएं, बाबा दरबार के अर्चक कराएंगे पूजन

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण-सुंदरीकरण के बाद बाबा दरबार से गंगधार तक 5,27,730 वर्ग फीट तक का क्षेत्र निखर उठा है। श्रद्धालु सुविधाओं के लिए चुनार के गुलाबी पत्थरों से बने भवनों की कतार और इनकी साज-संवार आकर्षित कर रही है। अब इंतजार है 13 दिसंबर का जब श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चकों के साथ ही देश भर से आए 200 संत-महंतों के स्वरों में चारों वेदों की ऋचाएं गूंजेंगी। रवि योग के संयोग में गणेश अथर्वशीर्ष और शिव सूक्त पाठ के बीच प्रधानमंत्री विस्तारित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण करेंगे। इससे पहले पीएम काशीपुराधिपति का षोडशोपचार पूजन करेंगे। देश भर से मंगाए गए प्रमुख नदियों व तीर्थों के जल से बाबा का अभिषेक करेगेें। इसे संत-महंत लेकर बनारस आएंगे। इस खास आयोजन में समस्त ज्योतिर्लिंगों, बड़े देवालयों, पीठों व अखाड़ों के संत-महंतों को आमंत्रित किया जा रहा है। धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से अखिल भारतीय संत समिति को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। लोकार्पण से पूर्व के समस्त अनुष्ठान श्रीकाशी विद्वत परिषद के निर्देशन में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से अर्चकगण करेंगे।

एनडीडीबी के हाथों में पराग डेयरी की बागडोर, दुग्‍ध उत्‍पादन और वितरण का रुतबा लौटाने की चुनौती

बहुत जल्द ही पराग डेयरी की बागडोर नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के हाथों में होगी।नई टीम पराग के व्यवसाय बढ़ने पर जोर देगी। 15 हजार लीटर प्रतिदिन के आवाक को दो लाख तक पहुचां कर पराग को पुराना रुतबा दिलाना चुनौतीपूर्व माना जा रहा है। एनडीडीबी को पांच साल तक के लिए पराग हस्तांतरित की मंजूरी मिल गई। 30 नवंबर से व्यवस्था शुरू होने की उम्मीद है। पुराने कर्मचारियों को दूसरे जगह शिफ्ट कर नये कर्मचारियों के बदौलत व्यवस्था पटरी पर लाने की तैयारी है। कर्मियों की कमी के कारण डेयरी घाटे में चली गई थी। अब अत्याधुनिक मशीनों के टेक्नीशियन की कमी दूर होगी। एनडीडीबी व शासन स्तर से हस्तांतरण के बाबत लिखा पढ़ी पूरी हो चुकी हैं। अब केवल स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण संबंधी कागजों का आदान प्रदान की कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जायेंगी। शासन से मंजूरी का लेटर भी पराग को मिल चुका है। एनडीडीबी भारत सरकार की एजेंसी है। देश में किसी भी पराग डेयरी में दिक्कत होने पर उसका समाधान नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड ही करती है। प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (पीसीडीएफ) द्वारा संचालित पराग डेयरी का संचालन नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) को मिलने वाली है।

Edited By: Abhishek Sharma