वाराणसी, इंटरनेट डेस्‍क। बनारस शहर की कई खबरों ने मंगलवार को चर्चा बटोरीं जिनमें 23-24 दिसंबर को अवकाश, बीएचयू अस्‍पताल की ओटी में आग, देसी गाय बनाएगी रोगमुक्‍त, पीएम लांच करेंगे प्रमाणन चिह्न, छात्रसंघ पर लगा ग्रहण आदि प्रमुख खबरें रहीं। जानिए शाम सात बजे तक की शहर-ए-बनारस की पांच प्रमुख और चर्चित खबरें।

वाराणसी में 23 और 24 दिसंबर को बंद रहेंगे सभी स्कूल, बड़ा दिन और रविवार मिलाकर चार दिन अवकाश

मौसम विभाग की ओर से आगामी तीन चार दिनों तक कड़ाके की ठंड व शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। संभावना व्यक्त की गई है कि तापमान में ओर गिरावट आएगी। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने शीतलहर को देखते हुए 23 व 24 दिसंबर को जिले में सरकारी व गैर सरकारी, यूपी बोर्ड, सीबीएससी व आईसीएसई के अंतर्गत संचालित समस्त विद्यालयों को बंद करने का निर्देश दिया है। साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को इसे प्रभावी कराने को कहा है। वहीं दूसरी ओर 25 दिसंबर को क्रिसमस डे और अगले दिन रविवार को अवकाश होने की वजह से लगातार चार दिनों तक का अवकाश शहर में स्‍कूलों में होने जा रहा है। कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच भीड़ पर भी इस अवकाश के जरिए लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।

सर सुंदरलाल अस्‍पताल के आपरेशन थिएटर में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, मरीजों को बाहर किया गया

बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्‍पताल की जनरल सर्जरी के ओटी नंबर दो के पैनल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की जानकारी होने के बाद परिसर में हड़कंप मच गया। जनरल सर्जरी की ओटी में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की जानकारी होने के बाद डॉक्टर और कर्मचारियों ने सूझ बूझ से आग पर काबू पाया गया। हालांकि, धुआं उठने और आग लगने की जानकारी होने के बाद परिसर में काफी देर तक हंगामा मचा रहा और मरीजों को आस पास से हटा दिया गया। सर सुंदर लाल अस्पताल की जनरल सर्जरी के ओटी नंबर दो के पैनल में अचानक शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग लग गई।आग लगते अंदर धुंआ धुंआ होने लगा जिसके कारण ओटी में मौजूद मरीज, डॉक्टर और कर्मचारियों में कुछ देर भगदड़ जैसा माहौल मच गया। लेकिन डॉक्टर और कर्मचारियों की सूझ बूझ से तत्काल बिना देर किए मरीजों को बाहर निकाल दिया गया।

वाराणसी में बोले विशेषज्ञ, भारतीय देसी गाय में हैं दुनिया के लोगों को रोगमुक्त बनाने की क्षमता

वेदों व भारतीय शास्त्रों में हमारे देश के ऋषि मुनियों ने भारतीय देशी गायों की गुणों का बखान किया है और आज वैज्ञानिक युग में भारतीय देशी गायों पर शोध हो रहा है। गाय के स्पर्श मात्र से कई बीमारियों से मुक्ति हो जाती है। भारतीय समाज प्राचीन काल से ही गाय को अपनी माता मानता रहा है। इसकी वजह यही रही है कि एक गाय अपने पालने वालों का ध्यान एक मां की तरह ही रखती है। बीमारी हो, अर्थोपार्जन हो या स्वास्थ्य की देखभाल हो, गाय सभी तरह से अपने बच्चों का ख्याल करती है। गाय को जब व्यापार का साधन बनाया गया तो देशी गाय की जगह, जर्सी गाय ने ले ली। भारत देशी गाय के औषधीययुक्त दूध से अलग होता चला गया व घर-घर अनेकानेक बीमारी पहुंच गई। देशी गौ पालन बीमारीमुक्त और तनावरहित वातावरण का निर्माण करता है। उपर्युक्त विचार विशाल भारत संस्थान एवं मुस्लिम महिला फ़ाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में लमही के सुभाष भवन में आयोजित “भारतीय देशी गाय : एक वैश्विक आवश्यकता” विषयक राष्ट्रीय विमर्श में वक्ताओं ने व्यक्त की।

डेरी उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पीएम लांच करेंगे प्रमाणन चिह्न 'डेरी मार्क'

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी गुरुवार को भारत में डेरी उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले एकीकृत लोगो और प्रमाणन चिह्न 'डेरी मार्क' लांच करेंगे। एकीकृत लोगो को "अनुरूपता मूल्यांकन योजना" के तहत लांच किया जाएगा। इसे आठ दिसंबर को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा अधिसूचित किया गया था। डेरी मार्क, पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जो प्रक्रिया में सुधार लाकर डेरी क्षेत्र में गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को प्रदर्शित करता है। यह भारत में निर्मित और रिटेल किए गए डेयरी उत्पादों में उपभोक्ताओं के विश्वास को बेहतर बनाने में मदद करेगा और डेयरियों में खाद्य सुरक्षा के कार्यान्वयन में निरंतरता सुनिश्चित करेगा। साथ ही, "डेरी मार्क" की शुरूआत से डेरी क्षेत्र में गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और बीआईएस क्रमशः प्रक्रिया और उत्पादों के प्रमाणीकरण में शामिल हैं। एनडीडीबी सहकारी समितियों के विभिन्न डेरी संयंत्रों को 'गुणवत्ता चिह्न' प्रदान कर रहा है, जो डेरी मूल्य श्रृंखला में प्रक्रिया मानकों का पालन करते है।

वाराणसी में महाविद्यालयों के छात्रसंघ पर भी लगा ग्रहण, आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे छात्रनेता

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव स्थगित होने से छात्राें में जबर्दस्त रोष है। वहीं दूसरी ओर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, यूपी कालेज, हरिश्चंद्र पीजी कालेज सहित जनपद के अन्य महाविद्यालयों में भी छात्रसंघ चुनाव पर ग्रहण लगने की संभावना है। छात्रसंघ चुनाव के लिए यूपी कालेज व हरिश्चंद्र पीजी कालेज में चुनाव अधिकारी की नियुक्ति भी की जा चुकी है। वहीं संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र चुनाव अधिकारी की नियुक्ति के लिए कुलपति पर दबाव बनाए हुए थे। विद्यापीठ का चुनाव स्थगित हाेने से विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के छात्रनेताओं का जोश ठंडा हो गया है। हालांकि, छात्रनेता आंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

विश्वविद्यालयाें व महाविद्यालयोंं में छात्रसंघ चुनाव के लेेकर जुलाई से ही प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। तमाम छात्रनेता अब तक प्रचार में लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं। विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव के नामांकन कई छात्रनेताओं का पचास से एक लाख रूपये खर्च होने का दावा किया जा रहा है।

Edited By: Abhishek Sharma