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डाकघर के जरिए कम लागत में विदेश तक पहुंचा सकेंगे बनारसी वस्त्र और हस्तशिल्प

By Arun Kumar Mishra Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 29 Oct 2026 03:46 PM (IST)

वस्त्र समिति ने वाराणसी में निर्यात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें बुनकरों, हस्तशिल्पियों और छोटे उद्यमियों को वैश्विक बाजार से ...और पढ़ें

निर्यात प्रक्रिया की दी जानकारी, बुनकरों और उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन व वित्तीय सहायता से कराया परिचित।

निर्यात प्रक्रिया की दी जानकारी, बुनकरों और उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन व वित्तीय सहायता से कराया परिचित।

HighLights

  1. बुनकरों, हस्तशिल्पियों हेतु निर्यात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।

  2. डाकघर से कम लागत पर उत्पाद निर्यात की जानकारी।

  3. निर्यात प्रक्रिया, वित्त, जोखिम प्रबंधन पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। वस्त्र मंत्रालय के अधीन वस्त्र समिति की ओर से बुधवार को होटल हिंदुस्तान इंटरनेशनल मलदहिया में निर्यात जागरूकता कार्यक्रम किया गया। टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीईएफसी) के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में निर्यात प्रक्रिया के ए से जेड चरणों और डाकघर निर्यात केंद्र के माध्यम से विदेशों में उत्पाद भेजने की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य बुनकरों, हस्तशिल्पियों, निर्माताओं और छोटे उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ना था।

वस्त्र समिति के सहायक निदेशक अम्बरीश सिंह ने वाराणसी और पूर्वांचल के वस्त्र उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने में टीईएफसी की भूमिका बताई। पूर्वी उत्तर प्रदेश निर्यातक संघ के महासचिव सैयद हसन अंसारी ने स्थानीय वस्त्र एवं हस्तशिल्प उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और ई-कामर्स के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।

डाकघर से निर्यात की प्रक्रिया समझाई
भारतीय डाक के अधीक्षक योगेश कुमार मिश्रा और अधिकारी आनंद प्रधान ने डाकघर निर्यात केंद्र, अंतरराष्ट्रीय पार्सल सुविधा और निर्यात दस्तावेजीकरण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डाक विभाग की सेवाओं से छोटे उद्यमी भी अपने उत्पाद विदेशी बाजारों तक पहुंचा सकते हैं।

विशेष सत्र में शिवेंद्र सिंह ने आयातक बाजार की पहचान, आयात-निर्यात कोड (आईईसी), गुणवत्ता प्रमाणन, मूल्य निर्धारण, पैकेजिंग, लाजिस्टिक्स, सीमा शुल्क और भुगतान प्रक्रिया समझाई। ईसीजीसी के शाखा प्रबंधक मुरलीधर महतो ने विदेशी खरीदारों से भुगतान न मिलने सहित वाणिज्यिक एवं राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षा देने वाली बीमा योजनाओं की जानकारी दी।

नाबार्ड की उप महाप्रबंधक सोनिका राणा ने ग्रामीण उद्यमिता, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और बुनकरों के लिए वित्तीय सहायता योजनाएं बताईं। वस्त्र मंत्रालय के सदस्य (राजभाषा) धर्मेंद्र त्रिपाठी ने भी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने निर्यात संबंधी समस्याओं पर चर्चा की। संचालन डा. राकेश द्विवेदी ने किया।