गाजीपुर, जेएनएन। सादात रेलवे स्टेशन पर गुरुवार की सुबह 3.40 मिनट पर गोरखपुर से कानपुर जाने वाली 15004 अप चौरीचौरा एक्सप्रेस से तीन सांडों के कटने से इंजन फेल हो गया । इसके चलते एक्सप्रेस करीब छह घंटे तक खड़ी रही। इस दौरान अन्य ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रहीं। हंगामे पर बापू धाम एक्सप्रेस को रोककर तमाम यात्रियों को वाराणसी तक भेजा गया। साढ़े नौ बजे ट्रेन को लाइट इंजन के सहारे आगे के लिए रवाना किया गया तब यात्रियों ने राहत की सांस ली।

सुबह करीब 3.40 मिनट पर चौरीचौरा एक्सप्रेस 100 किमी की स्पीड से मेन लाइन से जा रही थी कि स्टेशन के उत्तरी छोर पर अचानक एक के बाद एक कर आए तीन सांड कट गये। तेज आवाज आने से ट्रेन मे सोए लोग किसी अनहोनी से डर गये। ट्रेन के पायलट सत्येंद्र ने आपात ब्रेक लगाकर रोका। चूंकि, ट्रेन स्पीड से थी इसलिए ट्रेन सादात रेलवे स्टेशन से दो किमी आगे तक चली गई। सांडों के कटने से इंजन का कैटर गार्ड सहित अन्य महत्वपूर्ण पार्ट टूटकर ट्रैक पर गिर गए। ट्रेन को बैक कर पुन: सादात रेलवे स्टेशन पर लाया और दो नंबर प्लेटफॉर्म पर खड़ा किया किया। डेढ़ घंटे बाद मऊ से दूसरा लाइट इंजन मंगाया गया तो इस इंजन को चौरीचौरा ट्रेन में जोड़ते समय कपलिंग फंस जाने से समस्या खड़ी हो गई। वाराणसी से आए लोको पायलट द्वारा कपलिंग जोड़ने पर ट्रेन चालू हुई तो दो बोगियां जाम हो गईं। इस दौरान अधिक समय तक ट्रेन खड़ी होने के कारण यात्रियों ने स्टेशन कक्ष मे घुसकर हो-हल्ला किया तो 55149 पैसेंजर व मडुआडीह जाने वाली बापू धाम एक्सप्रेस को रोककर उसमें यात्रियों को चढ़ाया गया। तब जाकर लोगों को कुछ राहत मिली। काफी मशक्कत के बाद किसी तरह बोगियों को दुरुस्त किया गया। इसके बाद साढ़े नौ बजे एक्सप्रेस को आगे के लिए रवाना किया गया।

ये ट्रेनें रहीं प्रभावित

चौरीचौरा का इंजन फेल होने के कारण माहपुर स्टेशन पर इंटरसिटी, जखनियां में 55149 पैसेंजर एवं दुल्लहपुर मे तमसा पैसेंजर खड़ी रही। इसके अलावा स्थानीय स्टेशन पर एक ट्रैक खाली होने के कारण अन्य ट्रेनों को धीरे-धीरे गुजारा जा रहा था।

डर गए थे स्टेशन मास्टर

स्टेशन मास्टर विजय प्रताप ने बताया कि ट्रेन मेन लाइन से पूरी रफ्तार से जा रही थी। वे हरी लाइट दिखाने के लिए प्लेटफॉर्म पर खड़े थे कि अचानक तेज आवाज आने लगी व गिट्टियां उड़कर प्लेटफॉर्म आ गई। इससे वे डर गए कि ट्रेन मे जरूर ही गड़बड़ हो गयी पर कुछ दूर जाने पर ट्रेन खुद ही रुक गई। तब उन्होंने राहत की सांस ली।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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