विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

इस बार 14 दिनों त‍क म‍िलेगी पितरों की कृपा, पितृपक्ष में षष्ठी और सप्तमी तिथि एक ही दिन

By saurabh agrawalEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 21 Sep 2026 11:05 AM (IST)

इस वर्ष पितृपक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक 14 दिनों का होगा, जिसमें षष्ठी और सप्तमी तिथि एक ही ...और पढ़ें

इस बार 14 दिनों का होगा पितृपक्ष, जानें श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियां और महत्व।

इस बार 14 दिनों का होगा पितृपक्ष, जानें श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियां और महत्व।

HighLights

  1. पितृपक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक 14 दिन चलेगा।

  2. षष्ठी और सप्तमी तिथि एक साथ पड़ने से अवधि घटी।

  3. मातृ नवमी 4 अक्टूबर को, पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। पितरों की कृपा पाने का पक्ष इस वर्ष 14 दिनों का होगा। पितृपक्ष का आरंभ 27 सितंबर से होगा और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस बार षष्ठी और सप्तमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण पितृपक्ष की अवधि कम हो रही है। जिनके पिता की मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई है, वे 26 सितंबर को पितृ श्राद्ध करेंगे।

ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। 2 अक्टूबर को षष्ठी और सप्तमी तिथि एक साथ आने के कारण पितृपक्ष की अवधि में कमी आ रही है। जिनके पिता की मृत्यु शस्त्र या विष से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी को किया जाता है। वहीं, जिनके पिता की स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी को हुई हो, वे द्वादशी तिथि को श्राद्ध करेंगे।

माता की मृत्यु किसी भी तिथि पर हुई हो, उनका श्राद्ध नवमी (मातृ नवमी) को करना चाहिए। इस वर्ष मातृ नवमी 4 अक्टूबर को है। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं को अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का अवसर मिलता है। यह समय परिवार के सदस्यों के लिए एकत्रित होने और अपने पूर्वजों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करने का होता है।

पितृपक्ष का महत्व भारतीय संस्कृति में अत्यधिक है। यह समय न केवल पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का है, बल्कि यह आत्मा की शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

पितृपक्ष के दौरान किए गए अनुष्ठान से पितरों की कृपा प्राप्त करने की मान्यता है। इस समय श्रद्धालु अपने पितरों के लिए विशेष भोजन तैयार करते हैं और उन्हें अर्पित करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस वर्ष पितृपक्ष की अवधि में कमी आने के कारण श्रद्धालुओं को अपने पितरों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए समय का सही प्रबंधन करना होगा। पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि इस समय का सही उपयोग करने से पितरों की कृपा प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।

पितृपक्ष का यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर अपने पितरों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिससे पारिवारिक बंधन और मजबूत होते हैं। पितृपक्ष का यह 14 दिनों का समय श्रद्धा, सम्मान और एकता का प्रतीक है, जो हमें अपने पूर्वजों की याद दिलाता है और उनके प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी उजागर करता है।