आजमगढ़, जागरण संवाददाता। सठियांव चीनी मिल परिक्षेत्र के गन्ना आपूर्तिकर्ता किसान काफी दिनों से गन्ने के मूल्य में वृद्धि की मांग करते रहे। आखिरकार सरकार ने 25 रुपये की वृद्धि कर किसानों के मुंह पर ताला लगा दिया। अब किसान मूल्य वृद्धि को लेकर कहीं संतुष्ट हैं तो कहीं अपेक्षा के अनुसार वृद्धि न होने पर नाराजगी जता रहे हैं। किसानों ने कहा कि सभी चीजों की महंगाई को ध्यान में रख सरकार को फैसला लेना चाहिए था।

सठियांव में जबसे आधुनिक चीनी मिल बनी है तबसे किसान गन्ना को अपनी आय का आधार मानकर खेती पर विशेष ध्यान देने लगे हैं। गन्ना का मूल्य प्रति क्विंटल काफी कम था, जिससे किसानों की लागत वसूल नहीं हो पाती थी। इसलिए परिक्षेत्र के किसान काफी लंबे समय से मूल्य को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। विगत दिनों 25 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य बढ़ाकर किसानों की मांग पर एक तरह से विराम लगा दिया, जबकि आज महंगाई आसमान छू रही है। पेट्रोल और डीजल के साथ ही खाद-बीज के दाम सुनकर किसानों को दिन में तारे नजर आ जाते हैं। सरकार है कि किस्तों में मूल्य में वृद्धि कर रही है। किसानों की मांग है कि गन्ना का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया जाए, तभी किसानों को लाभ होगा।

ढकवा गांव के किसान रामनयन यादव ने कहा कि पिछले कई वर्षों से सरकार किसानों की आवाज नहीं सुन रही थी। अब चुनाव सामने है तो किसानों का दर्द समझ में आया और मामूली वृद्धि कर किसानों को बरगला रही है। मोहब्बतपुर गांव के किसान जयप्रकाश यादव ने कहा कि चीनी मिल सठियांव परिक्षेत्र में काफी किसान हैं जो गन्ने की खेती कर फसल का लेनदेन चीनी मिल से कर परिवार चलाते हैं। महंगाई के हिसाब से 25 रुपये बढ़ाना कोई मायने नहीं रखता।पाही जमीन पाही गांव के वीरेंद्र प्रताप गौतम ने कहा कि सरकार किसानों के हित में सोचा तो सही।मूल्य वृद्धि से किसानों के घाव कुछ तो भरेंगे। भीतरी गांव के जीवनाथ यादव ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुना करने का वादा कर भूल गई है।

Edited By: Abhishek Sharma