वाराणसी [सौरभ चंद्र पांडेय]। वर्तमान समय में बनारस के अस्सी घाट की पहचान जहां पप्पू की चाय की अड़ी, साहित्कारों और बुद्धिजीवियों की जुटान और सुबह-ए-बनारस से है तो फलाहार के लिए भी यह चर्चित है। अस्सी चौराहे पर स्थित लगभग 80 वर्ष पुरानी मधु बहार नामक फलाहार की दुकान पर व्रतियों की जरूरत पूरी होती है। यहां नवरात्र में व्रत्रियों की खूब जुटान होती है। दुकान की तीसरी पीढ़ी के राजेश कुमार और विजय कुमार बताते हैं कि दादा स्व. शंभू साव ने फलाहार अड़ी की नींव रखी। पिता स्व. उमाशंकर ने परंपरा और स्वाद को संजोया और हम अब उसे आगे बढ़ा रहे हैं। प्रतिष्ठान पर कार्यरत प्रदीप ने बताया कि देवी मां को सफाई बहुत प्रिय है जिसको ध्यान में रखकर हम लोग फलाहारी व्यंजन को बहुत ही साफ-सफाई के साथ तैयार करते हैं और ग्राहकों को परोसते हैं।

सिंघाड़े के आटे का लड्डू- नवरात्र व्रत्र के लिए इस दुकान का यह सबसे स्पेशल व्यंजन है। जो काशी के किसी और दुकान पर उपलब्ध नहीं होता है। सिंघाड़े के आटे को देसी घी में भूनकर और मेवे के टुकड़े मिलाकर इसे तैयार किया जाता है।

आलू दम- उबले आलू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर देसी घी में तला जाता है। इसमें जीरा व स्पेशल धनिया-मिर्च की चटनी मिलाई जाती है। जो ग्राहकों को पसंद आता है।

सिंघाड़े व कुट्टू की पूड़ी व सब्जी- व्रत के लिए दोपहर 12 से रात 9 बजे के बीच सिंघाड़े और कुïट्टू के आटे की पूरी और फलाहारी सब्जी की ग्राहकों में खूब मांग होती है।

सिंघाड़े के आटे व आलू की पकौड़ी- यह सिंघाड़े के आटे और आलू को मिलाकर तैयार किया जाता है।

पनीर की पकौड़ी- नवरात्र के प्रथम व आखिरी दिन व्रतियों को चटपटा खाने का मन हो तो इस दुकान पर पनीर की पकौड़ी भी उपलब्ध होती है। जिसके साथ धनिया-मिर्च और टमाटर की चटनी भी परोसी जाती है।

शहतूत सी जलेबी- यह खोवे से बनी एक तरह की जलेबी है। जिसका आकार शहतूत (एक प्रकार का फल) की तरह होता है।

रामदाना का लड्डू- व्रतियों के लिए दुकान पर स्पेशल रामदाने का लड्डू तैयार किया जाता है। जिसे ग्राहक बहुत पसंद करते हैं। इसके अलावा फलाहारी नमकीन, आलू चिप्स, मीठी दही, छेने का दहीबड़ा भी उपलब्ध रहता है।

 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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