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दीपावली के पूर्व से लेकर बाद तक हैं खरीद के शानदार शुभ मुहूर्त, मान्‍यताओं को जानकर चौंक जाएंगे

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 27 Oct 2026 05:55 PM (IST)

दीपावली से पहले और दौरान खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्तों का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें ज्योतिष विशेषज्ञों की ...और पढ़ें

दीपावली खरीदारी के शुभ मुहूर्त: लक्ष्मी आगमन के लिए कब और क्या खरीदें।

दीपावली खरीदारी के शुभ मुहूर्त: लक्ष्मी आगमन के लिए कब और क्या खरीदें।

HighLights

  1. दीपावली से पूर्व और धनतेरस तक खरीदारी के शुभ मुहूर्त।

  2. रिक्ता तिथि, राहुकाल और भद्रा में खरीद से बचने की सलाह।

  3. राशि अनुसार वस्तुएं और रंग खरीदने से मिलेगा विशेष लाभ।

शैलेश अस्थाना, जागरण वाराणसी। शक्ति की आराधना व संचयन का पर्व नवरात्र व दशहरा बीतते ही सनातन धर्मावलंबी अब दीपावली की तैयारियों में जुट गए हैं। दीपावली पर्व पर मां लक्ष्मी के आगमन और पूजन के पूर्व घर में नई वस्तु, धन-धान्य, भूमि-भवन, वाहन, रत्न-धातु, वस्त्र, द्रव्य आदि की खरीद करना शुभ माना जाता है।

मान्यता है इन वस्तुओं की खरीद स्थिर लग्न और शुभ मुहूर्त में करने से जीवन में संपदा और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। धर्मशास्त्र कहते हैं कि आभूषण, वाहन, वस्त्र, घर, मकान, जमीन तथा अन्य जीवनोपयोगी सामग्रियों की खरीदारी केवल भौतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, भौतिक सुख-सुविधा और दीर्घकालिक सुव्यवस्था का द्योतक होती हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब इन वस्तुओं का क्रय शुभ वार, नक्षत्र, तिथि और लग्न के योग से निर्मित शुभ मुहूर्त में करते हैं तो यह उस वस्तु विशेष से जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा का शमन कर सकारात्मकता का संचार करती है। शुभ मुहूर्त में खरीदी गई संपत्ति या वस्तुएं लंबे समय तक उपयोगिता, सुरक्षा, और आरोग्यता प्रदान करती हैं तथा जातक के जीवन में निरंतर प्रगति और मंगलमय फल सुनिश्चित करती हैं।

रिक्ता, मंगल, शनि, भद्रा, भरणी छोड़ प्रत्येक काल खरीद के लिए शुभ : प्राे. विनय पांडेय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय का कहना है कि वैसे तो सभी आवश्यक जीवनोपयोगी वस्तुओं को छोड़ अन्य सभी विशिष्ट संपदाओं की खरीद के लिए मुहूर्त के निर्धारण क्रय करने वाले की नाम राशि और उसके गोचर आदि की स्थिति को देखने के बाद ही किया जाता है परंतु कुछ तिथियां हैं जिनमें सामान्यतया वस्तुओं के क्रय के लिए शुभ हैं।

ये क्रय मुहूर्त प्रत्येक माह में निरंतर आते रहते हैं इसलिए अपनी आवश्यकता और योजना के अनुसार ही खरीदारी करनी चाहिए। किसी भी नई संपदा की खरीद के लिए इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि रिक्ता तिथियों (जैसे- चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, शनि और मंगल को छोड़ लगभग सभी दिन सामान्य तौर पर शुभ होते हैं। फिर भी खरीद के समय भद्रा, भरणी, नक्षत्रों के योगों से बचा जाना चाहिए।

वैसे लाल वस्त्र और काले वस्त्र को प्रयोग क्रमश: मंगलवार व शनिवार को किया जाना शुभ होता है परंतु उस दिन खरीद नहीं करनी चाहिए। दीपावली के पूर्व शुभ मुहूर्त की तिथियों की बात करें तो 22, 26, 30 अक्टूबर और 2, 5, 6 नवंबर की तिथियां शुभ हैें। गुरु-बृहस्पति के अस्तकाल का विचार विवाहादि में तो राहुकाल का विचार यात्रा में किया जाता है।

29 अक्टूबर से आरंभ हो रहे खरीद के शुभ मुहूर्त : पं. ऋषि द्विवेदी

ख्यात ज्योतिर्विद पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि मां लक्ष्मी के शुभागमन के पूर्व क्रय की जाने वाली वस्तुएं घर में शुभ मुहूर्त में आएं या संपत्तियां सुखकारी व स्थायी हों, इनके लिए पूरी तरह से मुहूर्त के शुभाशुभ का विचार आवश्यक है। इन सभी बातों का ख्याल करें तो 14 से 28 अक्टूबर तक शुक्र अस्त हैं। शुक्रास्त की स्थिति में मांगलिक कार्यों से बचते हैं। ऐसे में दीपावली की खरीद के लिए 29 अक्टूबर से बाजार का रुख करना उचित होगा। घर से बाजार निकलते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि राहुकाल और भद्रा न हो। उनके अनुसार खरीद के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-

29 अक्टूबर (गुरुवार) - राहुकाल दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक। इस अवधि को छोड़ कभी भी सोना, चांदी सहित किसी भी कीमती धातु की खरीद का शुभ मुहूर्त है।

30 अक्टूबर (शुक्रवार) - राहुकाल : प्रात: 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक। इस समय को छाेड़ अन्य काल में गऊ, वस्त्र, दवा तथा मेडिकल से संबंधित वस्तुओं की खरीद के लिए शुभ समय है।

31 अक्टूबर (शनिवार) - राहुकाल : प्रात: 7:30 बजे से नौ बजे तक को छोड़ किसी भी समय, वस्त्र, बिजली से संबंधित सामान खरीद सकते हैं, शनिवार का दिन होने से लोहे के सामान की खरीद से बचें।

01 नवंबर (रविवार) - राहुकाल दोपहर बाद 4:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक। इस अवधि के अतिरिक्त शेष काल में वाहन, रत्नादि, स्वर्णादि धातुएं क्रय करें।

02 नवंबर (सोमवार) - राहुकाल प्रात. 7:30 से नौ बजे तक। इसके बाद किसी नए व्यापार में निवेश कर सकते हैं। भूमि, भवन, गऊ, अश्व, गज आदि की खरीद शुभ फल देने वाली होगी।

03 नवंबर (मंगलवार) - राहुकाल दोपहर बाद तीन बजे से 4:30 बजे तक है। इसके पूर्व या पश्चात अचल पूंजी यानी भूमि भवन, चल पूंजी स्वर्णादि, रत्नादि का क्रय किया जा सकता है।

04 नवंबर (बुधवार) - राहुकाल दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक है। इसी बीच प्रात:काल से लेकर 1:18 बजे तक भद्रा नक्षत्र है। इसलिए 1:30 बजे के बाद ही वस्त्रादि, चमड़े से बनी वस्तुओं का क्रय शुभ फलदायी रहेगा।

05 नवंबर (गुरुवार) - राहुकाल 1:30 बजे से 3:00 बजे तक। इस कालखंड के अतिरिक्त भूमि, भवन, स्वर्ण, इलेक्ट्रिक सामान खरीद सकते हैं।

06 नवंबर (शुक्रवार) - धनतेरस के दिन प्रात:काल 10:30 बजे से 12 बजे तक राहुकाल है। पूरे दिन सोना, चांदी, गहना कोई भी वस्तु खरीदी जा सकती है।

07 नवंबर (शनिवार) - राहुकाल प्रात: तीन बजे से 10:30 बजे तक के पश्चात पूरे दिन खरीद का शुभ योग7

08 नवंबर (रविवार) - दीपावली। किसी भी खरीद, कार्य, व्यवसाय में निवेश के लिए पूरे दिन शुभ मुहूर्त। सायंकाल 4:30 बजे से 6:00 बजे तक राहुकाल।

09 नवंबर (सोमवार) - राहुकाल प्रात: 7:00 बजे से 9:00 बजे से तक। शेष कालखंड में प्रत्येक वस्तु की खरीद का शुभ मुहूर्त।

भौतिक जीवन हो या आध्यात्मिक शुभ समय का बड़ा महत्व : प्रो. सुभाष पांडेय

भौतिक या आध्यात्मिक जीवन में शुभ समय का बहुत बड़ा महत्व है। जिस प्रकार आध्यात्मिक साधना में शुभ मुहूर्त की परम आवश्यकता होती है उसी प्रकार भौतिक वस्तुओं को शुभ मुहूर्त में खरीदने पर चीरकाल तक वह वस्तुएं संरक्षित रहती हैं तथा उसके उपभोग करने वाले व्यक्ति को सुख शांति की वृद्धि होती है जैसे भूमि, वाहन, गृह साज सज्जा आभूषण, नया वस्त्र, आदि का क्रय करना शुभ काल में उत्तम फल को देने वाला होता है तथा अशुभ काल में खरीदने पर हानि होती है।

मानव जीवन में शरद ऋतु वस्तुएं खरीदने का उत्तम समय होता है। गांवों से लेकर शहरों तक दीपावली के पूर्व सभी लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार भौतिक वस्तुओं को वर्षपर्यंत उपभोग के लिए क्रय करते हैं। इसलिए 21 अक्टूबर से दीपावलीपर्यंत शुभ मुहूर्त में वस्तुओं की खरीद की जा सकती है।

  • 21 अक्टूबर : सायं चार बजे से आभूषण वाहन भूमि का क्रय।
  • 22 अक्टूबर : दिन में 11 बजे के बाद वाहन एवं रत्नों का क्रय।
  • 26 अक्टूबर : दुकान एवं प्रतिष्ठान खोलने का शुभ मुहूर्त।
  • 28 अक्टूबर : दोपहर 1:30 बजे के बाद पशु, वाहन, पलंग, एवं वस्त्र खरीदेंं।
  • 30 अक्टूबर : भूमि, पलंग, सोफा, आभूषण, वाहन, खरीदें।
  • 01 नवंबर : गृह की साज-सज्जा के सामान, नए वस्त्र।
  • 04 नवंबर : भूमि, वाहन, आभूषण आदि खरीदें।
  • 05 नवंबर : रत्न आभूषण, वस्त्र एवं गृह साज-सज्जा खरीदें।
  • 06 नवंबर : धनतेरस - पूरे दिन चांदी, सोना, पीतल आदि खरीदें।

खरीद में राशि व रंगों का भी महत्व : आचार्य दैवज्ञ कृष्ण

आचार्य दैवज्ञ कृष्ण ने बताया कि दीपावली पर्व पर खरीदी गई वस्तुएं सुखदायक व चिरकालिक हों, इसके लिए अपनी राशि के अनुसार खरीद की वस्तुओं का रंग भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए खरीद करते समय अपनी राशि के अनुसार सामग्री के रंग को भी महत्व दें--

  • मेष एवं वृश्चिक राशि : मेष राशि वालों का स्वामी मंगल है। मंगल को भूमिपुत्र कहा गया है। तांबे के बर्तन, पीतल की वस्तुएं या लाल वस्त्र। आप जमीन का भी क्रय कर सकते हैं और जमीन से निकलने वाली चीजों की भी। इलेक्ट्रिक व इलेक्ट्रानिक वस्तुएं भी शुभदायी होंगी।
  • वृषभ व तुला : वृषभ और तुला राशि वालों का स्वामी शुक्र को माना गया है। शुक्र श्वेत वर्ण के हैं7 चांदी के सिक्के, चांदी के बर्तन या हीरे के आभूषणों के साथ साथ में सफेद वस्त्र, लग्जरी गाड़ियां, घड़ियां खरीद सकते हैं।
  • मिथुन व कन्या : इन राशियों का स्वामी बुध को माना गया है। कांसे या पीतल के बर्तन, हरे रंग की वस्तुएं। साथ साथ में चांदी से बनी सामग्रियां चांदी के बर्तन आदि खरीदें।
  • कर्क : चांदी के बर्तन, मोती या सफेद वस्त्र। वाहन भवन आदि इलेक्ट्रानिक सामान आदि।
  • सिंह : सोने के आभूषण, तांबे का पात्र या सूर्य से जुड़ी वस्तुएं। सूर्य को राजा माना गया है। ऐसे व्यक्तियों को सोना और सोने से बनी वस्तुओं का क्रय करना सबसे उत्तम है।
  • मकर : कुंभ, स्टील के बर्तन, लोहे के सामग्रियां वाहन या नीलम रत्न। धनिया व झाड़ू अवश्य खरीदें।
  • मीन व धनु : सोने के गहने, पीतल के बर्तन या धार्मिक पुस्तकें, मूर्तियां, धनिया साथ-साथ में पीली वस्तुएं, पीले वस्त्र, हल्दी एवं झाड़ू अवश्य खरीदें।