वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान को भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का दर्जा दिलाने के बाबत मंगलवार को नीति आयोग, नई दिल्ली में समीक्षा बैठक हुई। इसमें एम्स जैसी सुविधा मिलने के बाद प्रशासनिक ढांचे व खर्चे पर नियंत्रण को लेकर भी गहन चर्चा की गई। कारण कि इस व्यवस्था के लागू हो जाने के बाद बीएचयू अस्पताल को स्वास्थ्य मंत्रालय फंड मुहैया कराएगा। इसी कड़ी को अंतिम रूप देने के लिए नौ जून को यहां पर पीएमओ की टीम आने वाली है। अंतिम रिपोर्ट 15 जून को प्रधानमंत्री के समक्ष रखेगी। इसके बाद इस पर मुहर लग जाएगी।

वर्तमान में बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल, आयुर्वेद विंग, दंत चिकित्सालय, ट्रामा सेंटर को यूजीसी से फंड मिलता है। इसके तहत अधिकतम फंड बढ़कर प्रति बेड दो लाख रुपये हुआ है। इससे अधिक फंड के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ही कुछ कर सकता है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खुद चाहते हैं कि पूर्वाचल व बिहार के लोगों को बेहतर व मुफ्त में उपचार मिले। इसी कड़ी में पीएमओ ने यहां के अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट लेकर बुलाया था। इसके तहत शनिवार को ही कुलपति प्रो. राकेश भटनागर व एसएस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. ओपी उपाध्याय नई दिल्ली पहुंच गए थे। उस दिन स्वास्थ्य मंत्रालय एवं पीएमओ में बैठक हुई। इसके बाद मंगलवार को नीति आयोग में इसकी समीक्षा हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन चले जाने के बाद आइएमएस पर निगरानी, खर्च पर नियंत्रण, प्रशासनिक पदों एवं अन्य नियमों पर चर्चा की गई।

जिस मद में फंड, उसी में खर्च

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शर्त लगाई है कि जिस मद में राशि दी जाएगी उसी मद में खर्च की जाएगी। इसमें किसी भी प्रकार की मनमानी नहीं होगी। सूत्र बताते हैं कि अब तक बीएचयू के क्रिया-कलापों की गुप्त रिपोर्ट मिलने के बाद मंत्रालय ने यह शर्त लगाई है। खैर, इस शर्त का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण भी लगेगा।

Posted By: Jagran