वाराणसी, जेएनएन। सिर्फ 15 दिन पहले जिस गरीब की थाली में दाल गाढ़ी दिखाई देती थी वही दाल अब पतली दिखाई देने लगी है। संभावना है कि आगामी दिनों में ये दाल भी उस थाली से गायब जाए क्योंकि अभी दलहन के भावों में उछाल बरकरार रहेगा और उम्मीद है कि यह 10 हजार का आंकड़ा पार कर जाए। हालांकि इस मामले में अर्थशास्त्री कृत्रिम आपूर्ति को दोषी मान रहे हैं, जहां वस्तु के दामों को चुनावी दौर में वृद्धि कर अधिक से अधिक लाभ कमाया जाता है।

दरअसल, गरीबों के लिए प्रोटीन का सबसे अच्छा व सुलभ स्रोत दाल माना गया है। ऐसे महत्वपूर्ण खाद्य वस्तु के दामों में पिछले 15 दिनों में लगभग दो हजार रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। कारोबारियों की मानें तो दलहन के दामों में वृद्धि का प्रमुख कारण वायदा कारोबार है। जबकि दलहन वाराणसी बाजार में भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां बाजार में दलहन कटनी, नागपुर व अकोला से आती है, जिसे प्रतिदिन लगभग 50 ट्रकों पर लायी जाती है। यानी पूर्वांचल व बिहार के आधे जिलों के लिए दलहन के मुख्य बाजार वाराणसी में हर रोज 16 हजार कुंतल दलहन की खपत है।

भावों में बदलाव के संबंध में विशेश्वरगंज भैरोनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता ने बताया कि आगामी दिनों में अभी दाम बढऩे की संभावना है। जिसका प्रमुख कारण चुनाव नहीं बल्कि वायदा कारोबार है। जबकि बाजार में दलहन की कमी नहीं है।

वस्तु के दामों में बढ़ोत्तरी का प्रमुख कारण कृत्रिम आपूर्ति जिम्मेदार होती है। इसे कालाबाजारी से भी नकारा नहीं जा सकता है। चुनाव का दौर भी जिम्मेदार होता है, जहां कम समय में वस्तु पर ज्यादा कमाई की जाती है। सरकार बनते ही स्थिति फिर सामान्य हो जाती है। 

- अनूप मिश्र, एसो. प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग बीएचयू।

एक पाक्षिक में भावों का अंतर

सामान          तब        अब

अरहर -        7200     8800

मूंग  -         6800     8600

चना -         5200      6000

उरद -         4800      6800

मटर -         5100      5600

चीनी-         3400      3800

 

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Posted By: Vandana Singh