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विक्रम संवत 2082 का अंतिम महीना फाल्गुन दो फरवरी से तीन मार्च तक, जान लें इस माह के प्रमुख पर्व और उत्‍सव

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 27 Jan 2026 05:21 PM (GMT+05:30)

विक्रम संवत 2082 का अंतिम फाल्गुन मास 2 फरवरी से 3 मार्च तक चलेगा, जिसमें वाराणसी में लगभग 30 व्रत-पर्व ...और पढ़ें

फाल्गुन 2026: वाराणसी में महाशिवरात्रि से होली तक 30 पर्वों का उत्सव।

फाल्गुन 2026: वाराणसी में महाशिवरात्रि से होली तक 30 पर्वों का उत्सव।

HighLights

  1. फाल्गुन मास (2 फरवरी - 3 मार्च) में 30 व्रत-पर्व।

  2. महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, होलिका दहन और होली प्रमुख।

  3. काशी में शिव बारात, भस्म होली, मां गौरा का द्विरागमन।

शैलेश अस्‍थाना, जागरण, वाराणसी। फाल्गुन का महीना अब वासंती उल्लास को बढ़ाने सप्‍ताह भर में आने जा रहा है। विक्रम संवत 2082 का अंतिम महीना फाल्गुन, जो दो फरवरी से आरंभ होकर तीन मार्च तक चलेगा, इस बार पूरे 30 दिनों का होगा। इस अवधि में सनातन धर्मावलंबियों के लिए लगभग 30 व्रत-पर्व और उत्सव मनाए जाएंगे।

फाल्गुन मास में शिव-शक्ति के मिलन का महापर्व महाशिवरात्रि भगवान शिव के विवाहोत्सव के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसके बाद रंगभरी एकादशी का पर्व आएगा, जब मां गौरा के द्विरागमन के साथ काशीवासियों का उत्साह और बढ़ जाएगा।

तारीख व्रत-त्योहार
02 फरवरी : फाल्गुन की शुरुआत
07 फरवरी : यशोदा जयंती
08 फरवरी : भानु सप्तमी, शबरी जयन्ती
09 फरवरी : जानकी जयंती , कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
13 फरवरी : कृष्ण भीष्म द्वादशी, कुम्भ संक्रान्ति, विजया एकादशी
14 फरवरी : शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत
15 फरवरी : महाशिवरात्रि, शिव विवाह
17 फरवरी : सूर्य ग्रहण, फाल्गुन अमावस्या
21 फरवरी : ढुण्ढिराज चतुर्थी
22 फरवरी : स्कन्द षष्ठी
24 फरवरी : होलाष्टक शुरू,मासिक दुर्गाष्टमी
25 फरवरी : रोहिणी व्रत
27 फरवरी : आमलकी एकादशी
28 फरवरी : मसान की होली
01 मार्च : रवि प्रदोष व्रत
03 मार्च : होलिका दहन
04 मार्च : होली

फाल्‍गुन का उल्‍लास

वसंतोत्सव की मादकता में डूबी काशी, मंदिरों, गलियों, सड़कों और घाटों से लेकर महाश्मशान तक रंगों में सराबोर नजर आएगी। काशी की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा के तहत यहां रंगों की होली के साथ-साथ चिता भस्म की होली भी खेली जाएगी, जो देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। महाशिवरात्रि पर निकलने वाली शिव बारात और भस्म होली देखने हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग काशी पहुंचते हैं।

होली और चंद्रग्रहण का योग

फाल्गुन मास का यह वासंती उल्लास होली तक अपने चरम पर रहेगा। इस बार होलिका दहन दो मार्च को है। हालांकि, फाल्गुन पूर्णिमा यानी तीन मार्च को पड़ने वाला चंद्रग्रहण होलिका दहन और रंगोत्सव के बीच एक दिन का अंतर पैदा कर देगा, जिसके कारण होली चार मार्च को मनाई जाएगी। उसके पूर्व मसाने की होली 28 फरवरी को खेलने के साथ ही काशी में रंगों का उल्‍लास ब‍िखरेगा। 

काशी में उत्‍सव

फाल्गुन का महीना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सवों का भी प्रतीक है। इस दौरान काशी में विभिन्न प्रकार के आयोजन होते हैं, जो स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं। इस दिन शिव बारात का आयोजन होता है, जिसमें भक्तजन भव्य तरीके से भगवान शिव की बारात का स्वागत करते हैं।

रंगभरी एकादशी के दिन मां गौरा का द्विरागमन काशीवासियों के लिए एक विशेष अवसर होता है। इस दिन लोग अपने घरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और मां गौरा के स्वागत के लिए तैयारियां करते हैं। इस अवसर पर काशी की गलियों में उल्लास और आनंद का माहौल होता है।

काशी के आयोजन

फाल्गुन मास में मनाए जाने वाले व्रत और पर्वों की सूची में महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, होलिका दहन और होली शामिल हैं। ये सभी पर्व काशी की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं और यहां के लोगों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। इस दौरान काशी की गलियों में रंगों की बौछार होती है, जिससे पूरा शहर एक उत्सव के रंग में रंग जाता है।

फाल्गुन का महीना काशीवासियों के लिए न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सवों का भी प्रतीक है। यह समय है जब लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियों का आदान-प्रदान करते हैं और अपने जीवन में नए रंग भरते हैं। फाल्गुन का यह महीना निश्चित रूप से काशी में वासंती उल्लास का संचार करेगा और सभी के लिए एक नई ऊर्जा का स्रोत बनेगा।