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वाराणसी में प्रधानमंत्री के उद्घाटन के बाद भी इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब नहीं हो पाया शुरू

By Shivam SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 29 Sep 2026 11:38 AM (IST)

वाराणसी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में 1.25 करोड़ की लागत से बनी इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (आइपीएचएल) प्रधानमंत्री ...और पढ़ें

वाराणसी में प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब बंद, मरीज परेशान।

वाराणसी में प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब बंद, मरीज परेशान।

HighLights

  1. वाराणसी में 1.25 करोड़ की आइपीएचएल लैब अभी तक बंद।

  2. प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने किया था वर्चुअल उद्घाटन।

  3. मशीनें और स्टाफ न होने से मरीज महंगे टेस्ट को मजबूर।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय पांडेयपुर में 1.25 करोड़ रुपये की लागत से बनी इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (आइपीएचएल) अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। 16 सितंबर 2023 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. मनसुख मांडविया ने वर्चुअल माध्यम से इसका शुभारंभ किया था। बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया।

लैब का उद्देश्य एक छत के नीचे टार्च, एपीएलए, कैंसर मार्कर, हार्मोनल टेस्ट (थायराइड समेत), कार्डियक प्रोफाइल, विटामिन की कमी, मालिक्यूलर बायोलाजी से जुड़ी जटिल जांचें तथा बायो-सेफ्टी लेवल-2 मानकों के तहत संक्रामक व गैर-संक्रामक रोगों से संबंधित 134 से अधिक जांचें उपलब्ध कराना था, ताकि जिले के आम मरीजों को निजी लैबों का सहारा न लेना पड़े। इसके बावजूद लैब आज भी बंद पड़ी है। कारण यह है कि मशीनें और स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई है।

18 जुलाई को निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वाराणसी के अपर निदेशक और सीएमओ को एक सप्ताह के अंदर इसे चालू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन 13 सितंबर तक व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पाई। दीनदयाल परिसर में बनी इस आधुनिक लैब के शुरू न होने से मरीज महत्वपूर्ण जांचों से वंचित हैं।

खासकर गर्भवती महिलाओं और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मामलों में टार्च (टाक्सोप्लाज्मा, रूबेला, सीएमवी, हर्पीस) और एंटीफास्फोलिपिड एंटीबाडी (एपीएलए) जैसी जरूरी जांचें सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध नहीं हैं। रेफरल सेंटर एमसीएच विंग कबीरचौरा, महिला अस्पताल पांडेयपुर और जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा समेत कई जगहों पर ये सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

बार-बार गर्भपात, जन्म दोष, ब्लड क्लाटिंग और अन्य प्रसव पूर्व जटिलताओं की पहचान के लिए ये जांचें बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। नतीजतन मरीजों को निजी लैबों में महंगे दामों पर टेस्ट कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। मरीज के स्वजन मनीष ने बताया कि गर्भपात के बाद डाक्टर ने टार्च और एपीएलए जांच के लिए विभिन्न सरकारी अस्पतालों का चक्कर लगाने को कहा, लेकिन कहीं भी सुविधा नहीं मिली। स्टाफ, उपकरण और संसाधनों की कमी के कारण ये जांचें अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं।

अभी जिलास्तरीय लेबल की जांच हो पा रही है। टार्च और एपीएलए, कैंसर मार्कर, हार्मोनल टेस्ट (थायराइड समेत), कार्डियक प्रोफाइल, विटामिन की कमी, मालिक्यूलर बायोलाजी की जांचें कब तक शुरू हो पाएंगी, हम कुछ नहीं कह सकते हैं।

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डा. एसपी मिश्रा, सीएमएस, पं. दीनदयाल उपाध्याय पांडेयपुर।