जागरण संवाददाता, वाराणसी। आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, कल्लीपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ड़ा.नरेन्द्र रघुवंशी समेत डा. समीर पाण्डेय, डा. एन.के.सिंह, डा. नरेन्द प्रताप एवं कृषि विभाग के खण्ड तकनीकी प्रबंधक देवमणि त्रिपाठी ने मंगलवार को हरहुआ विकास खण्ड के ग्राम भटपुरवा कला में 50 एकड़ क्षेत्रफल में पैडी ड्रम सीडर विधि द्वारा बोई गई धान के प्रदर्शन का निरिक्षण किया। कृषि विज्ञानियों ने किसानों के साथ विस्तार से चर्चा भी किया।

केवीके के अध्यक्ष ने बताया कि यदि कृषक ड्रम सीडर से धान की सीधी बुवाई करें तो समय के साथ रोपाई समेत मजदूरी एवं सिंचाई पर आने वाले व्यय में कमी आती हैं। समय से बुवाई होने पर फसल भी समय से तैयार हो जाती हैं। इसके बाद आलू या सरसों की बुवाई भी समय से कर सकते हैं। कृषकों को ड्रम सीडर की संरचना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक बेलन पर 4 से 5 प्लास्टिक का ड्रम जो 60 सेंटीमीटर व्यास का होता है।जिसपर 8 से 9 सेंटीमीटर व्यास का छेद बना होता है। बेलन के दोनों किनारों पर प्लास्टिक के पहिया लगा होता है,सीडर को चलाने के लिए बेलन से जुडा हैंडल होता है।

जिसको पकड़ कर आगे की ओर चलाया जाता है।रोपण विधि में एक एकड़ पर दो हजार से तीन हजार तक का व्यय आता हैं, जबकि इस विधि से दो मजदूर द्वारा चार से पांच घंटे में एक एकड़ की बुवाई हो जाती है। जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है। किसानों को बताया गया कि धान को बोने से 20 से 24 घंटे पूर्व पानी से भिगो कर रख देते है,जब दाना हल्का अंकुरित हो जाए तो बीज को एक से दो घंटे तक छायेदार स्थान पर रख कर सूखा ले।बीज शोधन के बाद ड्रम में भरकर लाइन में सीधी बुवाई करते है, जिससे खरपतवार एवं कीट नियंत्रण आसानी से किया जा सकता है। इस तकनीकी से किसान प्रति हेक्टर आठ से दस हजार रुपए की बचत कर सकते हैं।

Edited By: Abhishek Sharma