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वाराणसी से प्रयागराज के बीच गंगा में जल पर‍िवहन के ल‍िए शुरू हुआ थालवेग सर्वेक्षण, दोनों शहरों के बीच शुरू होगी क्रूज सेवाएं

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 13 May 2026 05:56 PM (IST)

गंगा नदी में वाराणसी और प्रयागराज के बीच जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए थालवेग सर्वेक्षण शुरू हो गया ...और पढ़ें

गंगा में वाराणसी-प्रयागराज के बीच जल परिवहन को मिलेगी गति, थालवेग सर्वेक्षण शुरू।

गंगा में वाराणसी-प्रयागराज के बीच जल परिवहन को मिलेगी गति, थालवेग सर्वेक्षण शुरू।

HighLights

  1. वाराणसी-प्रयागराज के बीच गंगा में थालवेग सर्वेक्षण शुरू।

  2. क्रूज और मालवाहक जलयानों का संचालन होगा सुगम।

  3. पर्यटन, व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। गंगा में नदी पर‍िवहन आधार‍ित पर्यटन की सेवाओं को गत‍ि देने के ल‍िए वाराणसी और प्रयागराज के बीच गंगा नदी में इन द‍िनों जल परिवहन को सुगम बनाने के लिए थालवेग सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। यह पूरा होने के बाद प्राप्‍त डाटा के अनुसार पूरी रूपरेखा  प्रारंभ हो गया है। इसके बाद प्राप्‍त पर‍िणामों के आधार पर ही गंगा में काशी से प्रयागराज के बीच क्रूज और मालवाहक जलयानों का संचालन गत‍ि पकड़ेगा। 

उत्तर प्रदेश में गंगा नदी पर स्थित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के प्रयागराज-वाराणसी खंड पर वर्तमान में थालवेग सर्वेक्षण चल रहा है। यह सर्वेक्षण नौवहन मार्ग की निगरानी और राष्ट्रीय जलमार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत सरकार के बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण इस कार्य को संचालित कर रहा है। इस बाबत बुधवार को एक्‍स हैंडल पर सर्वे की जानकारी साझा की गई है। 

इस सर्वेक्षण के माध्यम से गंगा नदी में जल परिवहन की संभावनाओं को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यटकों के लिए क्रूज सेवाओं की शुरुआत होगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और परिवहन में भी सुधार होगा। वाराणसी और प्रयागराज के बीच जल मार्ग का विकास क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

गंगा नदी का जल परिवहन एक प्राचीन परंपरा है, जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण के परिणामस्वरूप, जल परिवहन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा। इसके अलावा, यह स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न करेगा।

थालवेग सर्वेक्षण के दौरान, नदी के गहरे हिस्सों का अध्ययन किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जल परिवहन के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो। इस सर्वेक्षण में नदी के प्रवाह, गहराई और अन्य भौगोलिक विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। थालवेग सर्वे का अर्थ है नदी या घाटी के तल में सबसे गहरे और सबसे निचले बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखा। यह नदी का वह मुख्य मार्ग है जहाँ पानी की धारा सबसे तेज़ और गहरी होती है। सरल शब्दों में, यह घाटी का सबसे निचला हिस्सा या जलमार्ग के बीच की सीमा रेखा है।

इस सर्वे के बाद प्राप्‍त आंकड़ों के आधार पर ही जलमार्ग का असली रूट सामने आएगा। इस रूट के स्‍पष्‍ट होने के बाद गाद न‍िकालने और अन्‍य दुश्‍वार‍ियों को दूर करने के ल‍िए व‍िभागीय कार्य भी गत‍ि पकड़ेंगे। थालवेग सर्वेक्षण गंगा नदी में जल परिवहन के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ पूर्वांचल की जल पर‍िवहन आधार‍िक आर्थ‍िकी को भी गत‍ि देगा।