आजमगढ़ [अनिल मिश्र]। वनगमन के समय जिस जीवनदायिनी तमसा नदी के किनारे शहर के राजघाट पर भगवान श्रीराम ने पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ विश्राम किया था। आज वहीं पौराणिक और ऐतिसाहिक नदी आजमगढ़, मऊ और बलिया तक प्रदूषित हो रहे पानी के स्वच्छ होने की गुहार लगाई रही है। हालत यह है कि नदी का पानी आचमन योग्य भी नहीं है। यह चौंकाने वाली रिपोर्ट क्षेत्रीय कार्यालय उत्तर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय वाराणसी द्वारा सितंबर व अक्टूबर में तीनों जिलों में लिए गए पानी के नमूने की जांच के बाद की है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय के रिपोर्ट की मानें तो जिस स्थान से तमसा नदी का उद्गम हुआ है, वहां से लेकर आजमगढ़, मऊ व बलिया तक किसी भी जिले में किसी औद्योगिक स्थान का प्रदूषित पानी नदी में नहीं गिराया जाता है। इसका प्रमुख कारण इन तीनों शहरों में अभी तक एसटीपी की व्यवस्था न होने से प्रतिदिन कई हजार एमएलडी गंदा पानी का सीवरेज के माध्यम से नदी में गिरना है। पैरामीटर पर पीने के पानी का पीएच सात के आसपास होना चाहिए, जबकि रिपोर्ट में इससे अधिक है। बीओडी (बायो टेक्निकल डिमांड) भी एक लीटर में तीन ग्राम से अधिक पाया गया है। डीओ (पानी में घुलित ऑक्सीजन) भी सात से अधिक है।

इस बारे में रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वाराणसी/आजमगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने कहा कि तमसा का पानी प्रदूषित होना चिंता का विषय है। हालांकि जहां से नदी का उद्गम हुआ है, वहां से बलिया तक कहीं भी किसी औद्योगिक इकाई का पानी नहीं गिरता। इसका प्रमुख कारण इन शहरों में एसटीपी का न होना है। यही कारण है कि प्रतिदिन कई हजार एमएलडी गंदा पानी सीवरेज के माध्यम से नदी में जाकर पानी को प्रदूषित कर रहा है।

 

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